क्या हमने आपको ग्राउंडेड रखा? हमें बताएँ ↓
रिपोर्ट2 स्रोत · 4 दावे सुरक्षित · 0 सत्यापितउल्लेखनीयसंख्या 2 / 2

स्पेसएक्स का स्टारशिप पहली बार कक्षा में पहुंचा, लेकिन उड़ान समय से पहले समाप्त हुई

SpaceX's Starship megarocket lifts off from the Starbase facility in Boca Chica, Texas, achieving orbit for the first time.
स्पेसएक्स का स्टारशिप मेगारॉकेट टेक्सास के बोका चिका स्थित स्टारबेस फैसिलिटी से उड़ान भरते हुए, जिसने पहली बार कक्षा (ऑर्बिट) हासिल की। Photo via The Hindu

अब तक बनाए गए सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्पेसएक्स के स्टारशिप ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को पहली बार कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। इसने टेक्सास के बोका चिका स्थित कंपनी के स्टारबेस फैसिलिटी से लॉन्चिंग की थी। इस पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल होने वाले लॉन्च सिस्टम का कक्षा में पहुंचना एक बेहद अहम मील का पत्थर साबित हुआ, जो नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम (जिसके तहत इंसानों को दोबारा चांद पर भेजा जाना है) और मंगल मिशन के लिए स्पेसएक्स के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिहाज से बेहद अहम है। हालांकि, हिंद महासागर के ऊपर डीसेंट (नीचे उतरने) के चरण के दौरान अंतरिक्ष यान के नष्ट हो जाने से यह उड़ान योजना से पहले ही समाप्त हो गई, जिससे इसके सभी टेस्ट उद्देश्य पूरे नहीं हो सके। यह लॉन्चिंग इससे पहले के उन टेस्ट उड़ानों के बाद हुई थी जो विस्फोटों या कक्षा तक न पहुंच पाने की वजह से असफल हो गईं थी। ऐसे में, समय से पहले अंत होने के बावजूद कक्षा में पहुंचने की यह उपलब्धि एक बड़ा कदम है।

स्पेसएक्स का स्टारशिप व्हीकल सोमवार को टेक्सास के बोका चिका स्थित कंपनी के स्टारबेस फैसिलिटी से उड़ान भरने के बाद पहली बार कक्षा में पहुंच गया। अब तक बनाए गए सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट के विकास में इसे एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है (The Hindu)। 120 मीटर से अधिक लंबे इस काले और चांदी के रंग के लॉन्च सिस्टम ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान के दौरान धुएं के घने गुबार के बीच उड़ान भरी। यह एक महत्वाकांक्षी मिशन था जिसके लगभग दस घंटे तक चलने और 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक सैटेलाइट्स को तैनात करने का इरादा था (The Hindu)।

ऊपरी चरण (अपर स्टेज) सुपर हेवी फर्स्ट-स्टेज बूस्टर से अलग हुआ और उड़ान शुरू होने के लगभग 26 मिनट बाद इसने कक्षा में प्रवेश कर लिया। एहतियात के तौर पर, अंतरिक्ष यान को शुरुआत में सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर लॉन्च किया गया था; विचार-विमर्श के बाद, लॉन्च टीम ने व्हीकल को पृथ्वी से लगभग 275 किलोमीटर ऊपर एक स्थिर गोलाकार कक्षा में धकेलने के लिए दूसरा बर्न (इंजन प्रज्वलन) किया, जिसके लिए लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की जरूरत थी (The Hindu)। कंट्रोल रूम में जश्न के बीच लॉन्च टीम के एक सदस्य ने घोषणा की, "स्टारशिप ऑर्बिटल है," और इसके कुछ मिनट बाद सैटेलाइट्स की तैनाती शुरू हो गई (The Hindu)।

यह सफलता इससे पहले की कई टेस्ट उड़ानों के बाद मिली है, जो सभी कम चुनौतीपूर्ण सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर थीं और कैरिबियन के ऊपर विस्फोटों या टूटने के साथ समाप्त हुई थीं (The Hindu)। इस मिशन में, स्टेज अलग होने के तुरंत बाद सुपर हेवी बूस्टर मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया, जबकि अपर स्टेज अपने निर्धारित ऑर्बिटल उद्देश्यों की ओर आगे बढ़ता रहा। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड Emerging टेक्नोलॉजी में सीनियर एनालिस्ट Kathleen Curlee ने लॉन्च से पहले कहा था कि कक्षा तक पहुंचने के लिए किया जाने वाला दूसरा बर्न "सबसे कठिन हिस्सा" था, जिसमें व्हीकल को जटिल ताकतों और गुरुत्वाकर्षण के बदलावों को संभालना होता है (The Hindu)।

कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश के बावजूद, यह उड़ान योजना से पहले ही समाप्त हो गई क्योंकि हिंद महासागर के ऊपर डीसेंट के चरण के दौरान व्हीकल नष्ट हो गया, जिससे पूरा टेस्ट प्रोफाइल पूरा नहीं हो सका (AP India)। इस मिशन के तहत अपर स्टेज को प्रशांत महासागर में लक्षित स्पलैशडाउन (उतरने) से पहले पृथ्वी की छह बार परिक्रमा करनी थी। स्पेसएक्स इस ऑर्बिटल मील के पत्थर को विकास के एक "रोमांचक नए चरण" की शुरुआत के रूप में देखता है, जिसमें इन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग (कक्षा में ईंधन भरने) का प्रदर्शन भी शामिल होगा। नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत इंसानों को चांद पर वापस भेजने और मंगल ग्रह के लिए कंपनी की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं के वास्ते यह क्षमता बेहद जरूरी है (The Hindu)।

उल्लिखित स्रोत

AP India·The Hindu