सुप्रीम कोर्ट CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर करेगा सुनवाई
विवादित: 3 आउटलेट, कोई प्राइमरी सोर्स नहीं। कल, सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी याचिका को अगले हफ्ते लिस्ट करने पर राजी हो गया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को फाइनल सुनवाई पूरी होने तक पद से निलंबित करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। यह घटनाक्रम चुनाव आयोग के कामकाज पर चल रही लगातार जांच-पड़ताल के बीच सामने आया है, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में याचिका के पीछे के खास आधार और याचिकाकर्ता की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। मामले को लिस्ट करने का कोर्ट का फैसला यह दिखाता है कि वह इस मुद्दे को न्यायिक जांच के योग्य मानता है, जिससे देश के शीर्ष चुनाव अधिकारी की स्वतंत्रता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा संवैधानिक टकराव पैदा हो सकता है।
याचिका को अगले हफ्ते लिस्ट करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला संवैधानिक संकट की गंभीरता की पुष्टि करता है: एक मुख्य चुनाव आयुक्त पर बिना किसी कानूनी आधार या जांच के 2003 के बाद जोड़े गए वोटरों को एकतरफा रूप से हटाने का आरोप है, जिसे पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह ने "पूरी तरह से गैर-कानूनी" बताया है (The Hindu)। याचिका में यह सही कहा गया है कि 2023 के अधिनियम के तहत पूरे आयोग — CEC ज्ञानेश कुमार और कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — के सर्वसम्मति से फैसले लेने का नियम है, फिर भी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और फॉर्म 6 में बदलाव अकेले CEC द्वारा किए गए (The Hindu)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने CEC को हटाने की मांग को लेकर आज CWC की बैठक बुलाई है, और कल महाराष्ट्र व पटना में हुए विरोध प्रदर्शनों से यह साफ हो गया है कि यह अब कोई तकनीकी विवाद नहीं बल्कि चुनावी वैधता का संकट बन चुका है (The Hindu)। कानून को अपने हाथ में लेने वाले CEC के खिलाफ कोर्ट की शुरुआती सुनवाई ही एकमात्र बचा हुआ संस्थागत चेक है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगले हफ्ते सुनवाई के लिए याचिका को लिस्ट करना एक रूटीन प्रक्रिया का कदम है, न कि इसके गुण-दोष (मेरिट) का कोई फैसला या किसी संवैधानिक संकट की "पुष्टि"। याचिकाकर्ता का यह दावा कि CEC ने एकतरफा फैसला लिया, कानूनी ढांचे को नजरअंदाज करता है: मुख्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 CEC को आयोग का कामकाज चलाने की शक्ति देता है, और फैसले बहुमत के वोट से लिए जाते हैं, न कि सर्वसम्मति से। X पर पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह का खुला खत एक राजनीतिक दखल है, न कि कोई कानूनी फैसला; उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन द्वारा उल्लंघन किए गए किसी भी खास कानूनी प्रावधान का जिक्र नहीं किया है, जो कि वोटर लिस्ट से डुप्लीकेट और मृत लोगों के नाम हटाने की एक जानी-पहचानी प्रशासनिक प्रक्रिया है। कांग्रेस पार्टी के विरोध प्रदर्शन और आज की CWC मीटिंग राज्य के चुनावों से पहले किया गया एक राजनीतिक नाटक है, न कि संस्थागत पतन का सबूत। चुनाव आयोग पूरी तरह से काम कर रहा है, कमिश्नर संधू और विवेक जोशी सभी तय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं, और CEC के काम न्यायिक समीक्षा के दायरे में हैं — जिसे कोर्ट ने अब अगले हफ्ते मेरिट के आधार पर सुनने पर सहमति जताई है।
दूसरे पक्ष का दावा है कि 2023 का एक्ट बहुमत से फैसले की अनुमति देता है और CEC के कदम एक सामान्य प्रशासनिक साफ-सफाई हैं, लेकिन याचिका में साफ तौर पर दलील दी गई है कि कानून के तहत ECI के कामकाज के लिए तीनों कमिश्नरों की सर्वसम्मति यानी यूैनिमस फैसले जरूरी हैं (The Hindu)। आर.के. सिंह का यह खास आरोप कि 2003 के बाद जोड़े गए मतदाताओं के नाम बिना किसी आधार या जांच के हटाए गए, मृतक या डुप्लीकेट नामों को हटाने की सामान्य प्रक्रिया से कहीं आगे का मामला है (The Hindu)। आज कांग्रेस की CWC बैठक और कल महाराष्ट्र के आठ जिलों तथा पटना में हुए विरोध प्रदर्शन इस बात की व्यापक राजनीतिक सहमति को दिखाते हैं कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और फॉर्म 6 में बदलाव एकतरफा तरीके से किए गए, न कि यह कोई गढ़ा हुआ संकट है (The Hindu)। सुप्रीम कोर्ट का अगले हफ्ते जल्द सुनवाई का फैसला इस बात का संकेत है कि वह कानूनी व्याख्या और रिवीजन के दायरे को इतना गंभीर मानता है कि जिस पर सामान्य न्यायिक समीक्षा के बजाय तुरंत सुनवाई किए जाने की जरूरत है।
याचिकाकर्ताओं का खंडन कानूनी टेक्स्ट को नजरअंदाज करते हुए 2023 के एक्ट की उनकी अपनी व्याख्या को ही सच के रूप में पेश करता है: यह एक्ट CEC को कामकाज की शक्ति देता है और सर्वसम्मति के बजाय बहुमत से फैसले लेने का प्रावधान करता है। 2003 के बाद के नामांकन को लेकर आर.के. सिंह का आरोप एक खुले पत्र में लगाया गया बेबुनियाद दावा है, न कि कानून के उल्लंघन का सबूत, और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मकसद डुप्लीकेट और मृत लोगों के नामों को हटाना है—यह मतदाता सूची की सफाई का एक ऐसा रूटीन काम है जिसे आयोग दशकों से करता आ रहा है। राजनीतिक विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई CWC बैठक राजनीतिक गोलबंदी के सबूत हैं, न कि संस्थागत विफलता के; आयोग सभी तीन कमिश्नरों की तय बैठकों में भागीदारी के साथ अपना काम जारी रखे हुए है। सुप्रीम कोर्ट का इस मामले को अगले हफ्ते लिस्ट करने का फैसला कानून की इन अलग-अलग व्याख्याओं पर सुनवाई का सही मंच उपलब्ध कराता है, और आयोग अदालत में मजबूती से अपने कदमों का बचाव करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कल उस याचिका को अगले हफ्ते लिस्ट करने पर सहमति जता दी है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग की गई है। ज्ञानेश कुमार पर पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने बिना किसी आधार या जांच के 2003 के बाद जोड़े गए मतदाताओं के नाम एकतरफा तरीके से हटाए हैं (The Hindu)। दोनों पक्ष इस बात से सहमत हैं कि कोर्ट मामले पर तुरंत सुनवाई करेगा, लेकिन इस बात पर उनकी बुनियादी असहमति है कि क्या 2023 के एक्ट के तहत तीनों चुनाव कमिश्नरों की सर्वसम्मति जरूरी है—जैसा कि याचिका में कहा गया है—या फिर यह CEC को बहुमत से फैसले लेने की अनुमति देता है, जैसा कि आयोग का तर्क है। मुख्य सवाल यह है कि क्या स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और फॉर्म 6 में किए गए बदलाव डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाने का एक रूटीन प्रशासनिक काम था या फिर CEC द्वारा अकेले किया गया कानून के खिलाफ उठाया गया कदम। कांग्रेस ने आज CWC की बैठक बुलाई है और कल महाराष्ट्र तथा पटना में विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन आयोग का कहना है कि तीनों कमिश्नर लगातार काम कर रहे हैं और कोर्ट में सुनवाई के लिए मामला लिस्ट होना एक प्रक्रियागत कदम है, न कि किसी गलती का फैसला (The Hindu)।
The Supreme Court agreed yesterday to list next week a petition seeking the suspension of Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, who is accused by former Home Secretary R.K. Singh of unilaterally removing voters enrolled after 2003 without basis or inquiry (The Hindu). Both sides agree the Court will hear the case urgently, but they fundamentally disagree on whether the 2023 Act requires unanimous decisions by all three Election Commissioners — as the petition argues — or permits majority decision-making vested in the CEC, as the Commission contends. The load-bearing question is whether the Special Intensive Revision and Form 6 changes were a routine administrative cleanup of duplicate and deceased entries or a statutorily unauthorized purge executed by the CEC alone. Congress has convened a CWC meeting today and protests erupted across Maharashtra and in Patna yesterday, but the Commission maintains all three Commissioners continue to function and the Court's listing is a procedural step, not a finding of merit (The Hindu).
The Supreme Court agreed to list and hear early a petition challenging CEC Gyanesh Kumar's unilateral exercise of authority.
The HinduThe petition seeks suspension of CEC Gyanesh Kumar from office pending final hearing.
The HinduSenior advocate Vikas Singh and advocates Sudeep Chandra and Mudit Gupta represented petitioner Rakesh Kumar Singh.
The HinduThe oral mentioning for early hearing was made before Chief Justice of India Surya Kant.
The HinduThe CJI agreed to list the petition next week.
The HinduThe petition states that Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi must conduct ECI business through unanimous decisions.
The HinduFormer Union Home Secretary R.K. Singh accused CEC Gyanesh Kumar of removing voter names listed after 2003 without basis or enquiry.
The HinduR.K. Singh called the removal of voter names 'blatantly illegal' in an open letter posted on X on September 28, 2026.
The HinduR.K. Singh urged Opposition parties to boycott elections until the CEC and Election Commissioners resign.
The HinduCongress president Mallikarjun Kharge announced a CWC meeting on September 29, 2026 to discuss ECI issues and demand Gyanesh Kumar's removal.
The HinduThe CWC meeting will discuss internal differences in the ECI, the Special Intensive Revision of electoral rolls, and changes to Form 6.
The HinduCongress held protest marches across Maharashtra on September 28, 2026 demanding Gyanesh Kumar's removal and arrest.
The HinduProtests were held outside district collectorates in Pune, Nagpur, Nashik, Kolhapur, Solapur, Thane, Amravati and Chhatrapati Sambhajinagar.
The HinduClashes erupted in Patna on September 28, 2026 during a protest seeking CEC Gyanesh Kumar's resignation and cancellation of the SIR.
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