नेपाल ने घातक बाढ़ के बाद चार ग्लेशियल झीलों का पानी खाली करने की योजना बनाई

बर्फ पिघलने से बढ़ते जोखिमों को उजागर करने वाली सिलसिलेवार घातक बाढ़ के बाद, नेपाल अधिक ऊंचाई वाली चार ग्लेशियल झीलों में पानी का स्तर कम करने जा रहा है। यह फैसला हाल ही में हुई उन विनाशकारी बाढ़ की घटनाओं के बाद आया है जिनमें दर्जनों लोग मारे गए थे और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। अधिकारियों की योजना सबसे खतरनाक झीलों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने और पानी निकालने की है ताकि प्राकृतिक बांधों पर दबाव कम किया जा सके। यह प्रयास उस व्यापक क्षेत्रीय चिंता को दर्शाता है जैसे-जैसे हिमालयी ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, नेपाल और पड़ोसी देशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लेशियल झील के फटने से आने वाली बाढ़) की घटनाएं बढ़ रही हैं।
रॉयटर की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, हिमालय में बर्फ पिघलने से पैदा हो रहे खतरों के बीच सिलसिलेवार घातक बाढ़ के बाद नेपाल अधिक ऊंचाई वाली चार ग्लेशियल झीलों में पानी का स्तर कम करेगा। यह फैसला हाल के महीनों में हुई विनाशकारी बाढ़ की घटनाओं के बाद आया है, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे और सड़कें, पुल तथा हाइड्रोपावर इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गए थे, जिसके चलते अधिकारियों को सबसे अस्थिर झीलों पर सुरक्षात्मक काम में तेजी लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस योजना में अतिरिक्त पानी निकालने और झीलों को रोके रखने वाले प्राकृतिक मोरेन बांधों पर दबाव कम करने के लिए साइफन पाइप लगाना शामिल है। बांध टूटने की स्थिति में निचले इलाकों के समुदायों को सुरक्षित निकलने के लिए अधिक समय देने वास्ते downstream अर्ली वार्निंग सेंसर भी लगाए जाएंगे। सैटेलाइट मॉनिटरिंग और फील्ड सर्वे के आधार पर इन चार झीलों को चुना गया है, जिनसे पता चला है कि तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों के कारण ये झीलें तेजी से फैल रही हैं। वैज्ञानिक इस रुझान को सीधे तौर पर हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में बढ़ते तापमान से जोड़ते हैं।
जैसे-जैसे स्थायी बर्फ के मैदान सिकुड़ रहे हैं और ढीली चट्टानों तथा तलछट से रुके हुए पिघले पानी का दायरा बढ़ रहा है, नेपाल और पड़ोसी देशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटनाएं आम होती जा रही हैं। जब कटाव, भूकंपीय गतिविधि या पानी के भारी दबाव के कारण वे बांध टूट जाते हैं, तो उसके बाद आने वाला सैलाब बिना किसी चेतावनी के किलोमीटरों दूर तक घाटियों को तबाह कर सकता है। हाल की आपदाओं ने मौजूदा मॉनिटरिंक नेटवर्क की सीमाओं और स्ट्रक्चरल इंटरवेंशन की तत्काल जरूरत को रेखांकित किया है।
उम्मीद है कि मानसून के अगले सीजन से पहले ड्रेनेज प्रोग्राम शुरू हो जाएगा, हालांकि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अधिक ऊंचाई पर लॉजिस्टिक्स, मौसम की सीमित खिड़की और साइटों की दुर्गमता के कारण काम की रफ्तार धीमी हो सकती है। तकनीकी डिजाइन और फंडिंग को लेकर वर्ल्ड बैंक और ICIMOD सहित इंटरनेशनल पार्टनर्स से सलाह ली गई है। हालांकि ये चार झीलें सबसे बड़ा और तत्काल खतरा बनी हुई हैं, लेकिन नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने 20 से अधिक अन्य झीलों की पहचान की है जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। इससे यह सवाल बना हुआ है कि देश व्यापक हिमालयी क्षेत्र में अपनी प्रतिक्रिया को कितनी तेजी से बढ़ा सकता है।

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