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आरबीआई ने नोट सॉर्टिंग मशीनों पर मास्टर डायरेक्शन जारी किए

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 1 और 2 अक्टूबर, 2026 को रेगुलेटरी और प्रशासनिक अपडेट्स की एक सीरीज जारी की। 2 अक्टूबर को, सेंट्रल बैंक ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35A और 56 के तहत नोट सॉर्टिंग मशीनों को नियंत्रित करने वाला एक मास्टर डायरेक्शन जारी किया। इससे एक दिन पहले, 1 अक्टूबर को, आरबीआई ने स्मॉल फाइनेंस बैंक अमेंडमेंट डायरेक्शन, 2026 प्रकाशित किए और श्री सुधाकर मल्ल को डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन के चीफ जनरल मैनेजर-इन-चार्ज के रूप में उनकी पिछली भूमिका से पदोन्नत करके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने गुरुवार को करेंसी हैंडलिंग के लिए अपने रेगुलेटरी ढांचे को समेकित (कंसोलिडेट) किया, और नोट सॉर्टिंग मशीनों पर एक मास्टर डायरेक्शन जारी किया जो 2009 से चले आ रहे सर्कुलर की सीरीज की जगह लेता है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35A और 56 के तहत जारी यह डायरेक्शन, बैंकों के लिए ऑथेंटिकेशन और फिटनेस सॉर्टिंग पैरामिटर्स पर एक सिंगल रेफरेंस पॉइंट स्थापित करता है, जिन्हें नोट्स को रीसायकल या रीइश्यू करने से पहले मशीनों को पूरा करना होगा (RBI).

नया मास्टर डायरेक्शन इस विषय से जुड़े पिछले सभी सर्कुलर को उनके जारी होने की तारीख से वापस लेता है। यह नए सीरीज के बैंकनोट्स की शुरुआत के बाद जुलाई 2022 में पेश किए गए संशोधित फिटनेस पैरामिटर्स को संहिताबद्ध (कोडिफाई) करता है, जिसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि एक फिट नोट असली होना चाहिए, अपने डिनॉमिनेशन की आसानी से पहचान के लिए पर्याप्त साफ होना चाहिए, और रीसाइक्लिंग के लिए उपयुक्त होना चाहिए, जबकि एक अनफिट नोट वह है जिसकी शारीरिक स्थिति या चरणबद्ध तरीके से हटाई गई सीरीज इसे अनुपयुक्त बनाती है। सभी फिटनेस पैरामिटर्स का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन किया जाना है, और फिट माने जाने के लिए एक नोट को हर पैरामिटर्स पर खरा उतरना होगा (RBI).

एक दिन पहले, बुधवार को, सेंट्रल बैंक ने स्मॉल फाइनेंस बैंकों में बड़े शेयरहोल्डिंग को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधन किया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (स्मॉल फाइनेंस बैंक्स – एक्विजिशन एंड होल्डिंग ऑफ शेयर्स और वोटिंग राइट्स) अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026 ने नवंबर 2025 में जारी मास्टर डायरेक्शन में संशोधन किया। हालांकि शुरुआती एक्विजिशन के लिए पूर्व मंजूरी अनिवार्य बनी हुई है, लेकिन यह संशोधन म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंडों द्वारा एक ही बैंकिंग कंपनी में बाद के एक्विजिशन के लिए वन-टाइम अप्रूवल देता है, बशर्ते वे विशिष्ट शर्तों को पूरा करते हों (RBI).

यह संशोधन "योग्य व्यक्ति" (क्वालिफाइंग पर्सन) की एक नई परिभाषा जोड़ता है जिसमें सेबी-पंजीकृत म्यूचुअल फंड, पीएफआरडीए-पंजीकृत पेंशन फंड और इर्डीएआई-पंजीकृत इंश्योरेंस कंपनियां शामिल हैं। यह यह भी स्पष्ट करता है कि किसी क्लाइंट द्वारा किए गए एक्विजिशन को उसके पोर्टफोलियो मैनेजर द्वारा अप्रत्यक्ष एक्विजिशन नहीं माना जा सकता है यदि क्लाइंट पंजीकृत मालिक है जो वोटिंग राइट्स का उपयोग करने का हकदार है, पोर्टफोलियो मैनेजर केवल एक सलाहकार के रूप में कार्य करता है जो गैर-बाध्यकारी सलाह देता है, और मैनेजर द्वारा उपयोग किए जाने वाले किसी भी वोटिंग राइट्स विशिष्ट क्लाइंट के आदेश पर आधारित होते हैं। ये बदलाव तुरंत प्रभावी हो गए (RBI).

बुधवार से प्रभावी एक अलग प्रशासनिक कदम में, आरबीआई ने श्री सुधाकर मल्ल को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया। मल्ल, लगभग तीन दशकों के अनुभव वाले करियर सेंट्रल बैंकर हैं, जो पहले डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन के चीफ जनरल मैनेजर-इन-चार्ज थे। उनकी सुपरवाइजरी पृष्ठभूमि बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों और को-ऑपरेटिव बैंकों में ढाई दशकों से अधिक की है, जिसमें विदेशी न्यायक्षेत्रों (जूरिस्डिक्शन) में लगभग पांच साल शामिल हैं। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में, वह डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन (सुपरवाइजरी असेसमेंट) की देखरेख करेंगे (RBI).

सेंट्रल बैंक ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से छह अतिरिक्त राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) तक राज्य सरकार के कर्ज के लिए अपनी बेंचमार्क इश्यूएंस स्ट्रेटजी का विस्तार किया। असम, गोवा, हरियाणा, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर इस ढांचे में शामिल हो गए हैं, जिसकी शुरुआत पहली तिमाही में नौ राज्यों के साथ एक पायलट के रूप में हुई थी और दूसरी तिमाही में नौ और राज्यों और दिल्ली तक इसका विस्तार किया गया था। अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान बाजार से कर्ज लेने के लिए सांकेतिक कैलेंडर में भाग लेने वाले राज्यों और यूटी में कुल ₹3,60,820 करोड़ के इश्यूएंस का अनुमान लगाया गया है (RBI).

RBI की तरफ से बुधवार को जारी मनी मार्केट के आंकड़ों से पता चलता है कि ओवरनाइट सेगमेंट में ₹6,71,792.20 करोड़ का वॉल्यूम दर्ज किया गया, जिस पर वेटेड एवरेज रेट 5.10 प्रतिशत रहा। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ट्रिपार्टी रेपो (Triparty Repo) सेगमेंट का रहा, जो ₹4,79,348.35 करोड़ (रेट 5.07 प्रतिशत) था, जबकि कॉल मनी सेगमेंट में ₹10,354.82 करोड़ का कारोबार हुआ और इसका रेट 5.22 प्रतिशत रहा। मार्केट रेपो का वॉल्यूम ₹1,76,419.98 करोड़ (रेट 5.15 प्रतिशत) रहा, और कॉर्पोरेट बॉन्ड में रेपो का वॉल्यूम ₹5,669.05 करोड़ (रेट 5.25 प्रतिशत) दर्ज किया गया (RBI)।

बुधवार को लिक्विडिटी ऑपरेशंस के परिणामस्वरूप ₹3,47,892 करोड़ की नेट अब्जॉर्प्शन (शुद्ध निकासी) हुई। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी के जरिए 5.00 प्रतिशत की दर पर ₹2,68,919 करोड़ सोखे गए, जबकि एक दिन के वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑपरेशन के जरिए 5.24 प्रतिशत की दर पर ₹85,424 करोड़ सोखे गए। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी के तहत 5.50 प्रतिशत की दर पर ₹6,451 करोड़ डाले गए (RBI)।

उल्लिखित स्रोत

RBI