‘कॉcroach’ प्रदर्शनकारियों ने भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की
विवादित: 4 आउटलेट, कोई प्राइमरी सोर्स नहीं। आज, वोटर लिस्ट में हेराफेरी के आरोपों को लेकर भारत के इलेक्शन चीफ के इस्तीफे की मांग को लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारी सेंट्रल दिल्ली में इकट्ठा हुए।

खुद को "कॉकरोच" आंदोलन बताने वाले प्रदर्शनकारियों ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर प्रदर्शन किया है। स्टूडेंट कोएलिशन और विपक्षी दलों के इस प्रदर्शन की वजह यह आरोप हैं कि इलेक्टोरल रोल से मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं और वोटर लिस्ट में हेराफेरी की गई है।
'कॉकरोच' आंदोलन कोई छिटपुट विरोध नहीं है, बल्कि नई दिल्ली और मुंबई में स्टूडेंट कोएलिशन और विपक्षी ताकतों द्वारा वोटर लिस्ट में की गई उस सिस्टमैटिक हेराफेरी के खिलाफ उठाया गया एक जरूरी कदम है, जिसकी वजह से वैध नागरिकों के नाम इलेक्टोरल रजिस्टर से हटा दिए गए हैं (AP India, Google News India, Reuters India)। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार उस संस्था की सीधी जिम्मेदारी संभालते हैं जिसका जनविश्वास खत्म हो गया है, क्योंकि वह यह सवाल का जवाब देने में नाकाम रही है कि बिना किसी नोटिस या ऑडिट ट्रेल के नाम कैसे गायब हो जाते हैं। जब लोकतंत्र के रखवाले ही इसके पतन का जरिया बन जाएं, तो उनके इस्तीफे की मांग ही एकमात्र सही कदम है।
'कॉकरोच' आंदोलन इस्तीफे की मांग को वोटर लिस्ट में हेराफेरी के आरोपों पर एक सही कदम बताता है, लेकिन ऐसा कोई भी खास मामला पेश नहीं करता जहां आयोग ने इलेक्टोरल रोल के रिवीजन से जुड़े कानूनी दायरे के बाहर जाकर काम किया हो। इलेक्शन कमीशन, रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत काम करता है, जो किसी भी नाम को हटाने से पहले समय-समय पर रिवीजन, डुप्लीकेट या अयोग्य नामों को हटाने और कानूनी रूप से आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाते हैं। "बिना नोटिस या ऑडिट ट्रेल के नाम हटाने" के आरोप उस कानूनी जरूरत के खिलाफ हैं जिसके तहत किसी भी नाम को हटाने से पहले फॉर्म 7 में नोटिस देना और सुनवाई का मौका देना जरूरी होता है, और इसके खिलाफ अपील डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के पास की जा सकती है। आयोग लगातार यह कहता रहा है कि मौजूदा रिवीजन साइकिल में भी वही पारदर्शी और नियमों के तहत चलने वाली प्रक्रिया अपनाई गई है जो 1950 के बाद से हर इलेक्शन साइकिल में इस्तेमाल होती रही है। साथ ही, आयोग ने किसी भी पीड़ित मतदाता को किसी भी तय जगह पर फॉर्म 6 के तहत क्लेम या फॉर्म 7 के तहत आपत्ति दर्ज कराने के लिए कहा है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर का इस्तीफा ऐसे संवैधानिक पद को राजनीतिक रंग दे देगा जिसे ठीक इसी तरह के दबाव से सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था, और इससे एक ऐसी मिसाल कायम होगी कि कोई भी विरोध प्रदर्शन—चाहे वह कितना भी बेबुनियाद क्यों न हो—एक स्वतंत्र संस्था के मुखिया को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है।
कमिश्नर उचित प्रक्रिया के सबूत के तौर पर फॉर्म 7 के नोटिस और कानूनी सुनवाई का हवाला देते हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप यह है कि उन नोटिसों को कभी भेजा ही नहीं गया या गलत पतों पर भेजा गया, जिससे हटाए गए हजारों मतदाताओं के लिए "सुनवाई का मौका" सिर्फ एक छलावा साबित हुआ (AP India, Google News India, Reuters India)। नियम पुस्तिका का हवाला देने से इस आरोप का खंडन नहीं होता कि असलियत में नियम पुस्तिका की अनदेखी की गई थी। आयोग ने इस बात का कोई कुल आंकड़ा जारी नहीं किया है कि कितने फॉर्म 7 नोटिस वास्तव में डिलीवर हुए और कितने बिना डिलीवर हुए वापस आए, और न ही उसने प्रक्रिया को तुरंत साफ करने के लिए स्वतंत्र ऑडिट के वास्ते अपने डिलीशन लॉग खोले हैं। नई दिल्ली और मुंबई में स्टूडेंट कोएलिशन और विपक्षी ताकतें इसी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, न कि इस पद के राजनीतिकरण की।
प्रदर्शनकारियों का जवाब इस आरोप से बदल गया है कि "कोई प्रक्रिया नहीं थी" और अब वे उसी कानूनी प्रक्रिया के "दोषपूर्ण क्रियान्वयन" (flawed execution) का आरोप लगा रहे हैं, जिसकी उन्होंने पहले अनदेखी की थी। इसके बावजूद वे इस दावे को साबित करने के लिए कोई मात्रात्मक (quantified) सबूत नहीं दे रहे हैं— न तो कोई सैंपल साइज, न जिला स्तर का डेटा और न ही कोई ऑडिट रिपोर्ट— जिससे यह साबित हो सके कि फॉर्म 7 के नोटिस systematically डिलीवर नहीं किए गए थे। इलेक्शन कमीशन के डिलीशन लॉग Electoral Registration Officer के स्तर पर मेंटेन किए जाते हैं और Registration of Electors Rules के तहत कोई भी नागरिक इनका निरीक्षण कर सकता है; छूटे हुए नोटिस का उपाय फॉर्म 6 के तहत एक क्लेम एप्लीकेशन है, जिसे कमीशन ने सार्वजनिक रूप से मतदाताओं से किसी भी अधिकृत केंद्र पर दाखिल करने का आग्रह किया है। एक ही रिवीजन साइकिल में बिना सत्यापन वाली क्रियान्वयन संबंधी शिकायतों पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर के इस्तीफे की मांग करना, जबकि कानूनी सुधार तंत्र खुला हुआ है और शिकायतकर्ताओं द्वारा उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, प्रशासनिक शिकायत को संवैधानिक संकट के रूप में पेश करता है। यह उस सुरक्षा कवच को खतरे में डालता है जो कमीशन को किसी भी तरफ से— जिसमें नई दिल्ली और मुंबई में मार्च निकाल रहे वही छात्र संगठन और विपक्षी ताकतें भी शामिल हैं— आने वाले दबाव का विरोध करने की अनुमति देता है।
प्रदर्शनकारी और इलेक्शन कमीशन इस बात पर सहमत हैं कि वोटर रोल में रिवीजन चल रहे हैं और नाम हटाए गए हैं, लेकिन इस बात पर असहमत हैं कि क्या उन डिलीशन्स के लिए कानून द्वारा अनिवार्य नोटिस-और-सुनाई (notice-and-hearing) की प्रक्रिया का वास्तव में पालन किया गया था या नहीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फॉर्म 7 के नोटिस डिलीवर नहीं किए गए थे या गलत पतों पर भेजे गए थे, जिससे सुनवाई का दिखावा भर हुआ, जबकि कमीशन का कहना है कि कानूनी ढांचे का पालन किया गया था और डिलीशन लॉग निरीक्षण के लिए खुले हैं, हालांकि उसने कुल डिलीवरी का डेटा जारी नहीं किया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या कमीशन नोटिस-डिलीवरी और डिलीशन के रिकॉर्ड प्रकाशित करेगा या नहीं, जिससे व्यवस्थित प्रक्रियागत विफलता के दावे की पुष्टि हो सके या उसे खारिज किया जा सके।
Protesters and the Election Commission agree that voter roll revisions are underway and that names have been removed, but they disagree on whether the legally mandated notice-and-hearing process was actually followed for those deletions. The protesters allege Form 7 notices were not delivered or sent to wrong addresses, making hearings illusory, while the Commission maintains the statutory framework was observed and deletion logs are open for inspection, though it has not released aggregate delivery data. The load-bearing question is whether the Commission will publish the notice-delivery and deletion records that would verify or falsify the claim of systematic procedural failure.
Protesters known as the 'Cockroach' movement demand the resignation of India's Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.
AP India · Google News India · Reuters IndiaThe protests are driven by allegations of voter roll manipulation and deletion of voters from electoral rolls.
AP India · Google News India · Reuters IndiaThe Cockroach Janta Party (CJP) is a Gen Z-led group involved in the protests.
Google News IndiaThe AP News article is titled 'Cockroach protesters demand India's election chief resign over voter list changes'.
AP IndiaReuters reported on the 'cockroach' youth party and student groups protesting for the poll chief's resignation.
Reuters IndiaDW.com reported hundreds gathered in central Delhi demanding Gyanesh Kumar's resignation.
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