दालों के आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है भारत, ताकि कीमतें नीचे आ सकें

रॉयटर्स द्वारा उद्धृत सूत्रों के अनुसार, घरेलू कीमतों को कम करने में मदद के लिए भारत दालों पर आयात शुल्क घटाने पर विचार कर रहा है। सरकार आयातित दालों को सस्ता करके और घरेलू आपूर्ति बढ़ाकर खाद्य महंगाई को काबू में लाना चाहती है, जिसके तहत इस संभावित कदम पर विचार किया जा रहा है।
रॉयटर्स द्वारा बुधवार को उद्धृत सरकारी सूत्रों के मुताबिक, घरेलू खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत भारत दालों पर आयात शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है। इस संभावित नीतिगत बदलाव का उद्देश्य ऐसे समय में विदेशी शिपमेंट को सस्ता करना और स्थानीय आपूर्ति को बढ़ावा देना है, जब कंज्यूमर प्राइस बास्केट में प्रोटीन की कीमतें लगातार बनी हुई हैं।
यह विचार-विमर्श ऐसी खाद्य महंगाई के बीच हो रहा है जो आसानी से कम नहीं हो रही है और जिसने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के मॉनेटरी ईजिंग चक्र को पेचीदा बना दिया है। हालांकि अगस्त में मुख्य (हेडलाइन) महंगाई में थोड़ी नरमी आई थी, जिसकी वजह आंशिक रूप से अनुकूल बेस इफेक्ट और सब्जियों की कीमतों में गिरावट थी, लेकिन बड़ी आबादी के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत रहने वाली दालों की कीमतें पिछले फसल वर्ष में कम घरेलू उत्पादन और वैश्विक स्तर पर तंग आपूर्ति के कारण ऊंची बनी हुई हैं (Reuters India)।
वर्तमान आयात शुल्क किस्म के हिसाब से अलग-अलग हैं; पीली मटर पर 50% टैरिफ लगता है, जबकि मसूर और चना पर क्रमशः 33% और 66% शुल्क लगता है। इस कटौती से कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से आयात की लागत प्रभावी रूप से कम हो जाएगी, जिससे मुख्य त्योहारों के सीजन से पहले थोक मंडियों और रिटेल बाजारों में कीमतें कम होने की संभावना है (Reuters India)।
यह कदम बाहरी क्षेत्र से जुड़ी व्यापक चिंताओं से भी जुड़ा है। इस हफ्ते एक अलग सरकारी रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आयातित महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे आक्रामक राजकोषीय या मौद्रिक प्रोत्साहन (स्टिमुलस) की गुंजाइश सीमित हो जाती है (Reuters India)। दालों का सस्ता आयात न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के जरिए सरकार द्वारा दोबारा तैयार किए जा रहे बफर स्टॉक को कम किए बिना, फूड सब-इंडेक्स पर कुछ दबाव को कम कर सकता है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और किसी भी शुल्क कटौती का समय और दायरा अभी चर्चा के अधीन है। कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट और फाइनेंस मिनिस्ट्री अपेक्षित डिफ्लेशनरी (महंगाई घटाने वाले) प्रभाव के मुकाबले राजस्व पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे हैं। यदि सहमति बन जाती है, तो आने वाले हफ्तों में ही औपचारिक नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।
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