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ममता बनर्जी ने INDIA ब्लॉक की बैठक में चुनाव आयोग की आलोचना की

विवाद: 4 आउटलेट, कोई प्राइमरी सोर्स नहीं। कल दिल्ली में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलेक्टोरल रोल पर चर्चा करने और चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर आरोप मढ़ने के लिए विपक्षी नेताओं से मुलाकात की।

West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee travels to Delhi to meet opposition leaders and discuss electoral rolls.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्षी नेताओं से मिलने और इलेक्टोरल रोल पर चर्चा करने के लिए दिल्ली पहुंचीं Photo via The Hindu

INDIA ब्लॉक के विपक्षी दलों ने इलेक्टोरल रोल के रिवीजन से जुड़ी चुनाव आयोग की कार्रवाई के खिलाफ अपनी रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को एक बैठक की। इस दौरान नेताओं ने पोल बॉडी पर "कठपुतली" की तरह काम करने का आरोप लगाया और विशेष रूप से इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया। कई राज्यों में वोटर लिस्ट अपडेट में कथित गड़बड़ियों को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से तनाव लगातार बढ़ रहा था, जिसके बाद यह बैठक हुई है। विपक्षी दलों का दावा है कि इन गड़बड़ियों के तहत जानबूझकर नाम हटाए और जोड़े गए हैं, जिससेRuling कोएलिशन को फायदा हुआ है। यह बैठक संसद में टकराव और संभावित कानूनी कार्रवाई, दोनों के जरिए EC के फैसलों को चुनौती देने के लिए एक एकजुट रणनीति का संकेत देती है। चुनावी शुचिता को लेकर चल रहे इस विवाद में यह एक बड़ा घटनाक्रम है।

विपक्ष (INDIA ब्लॉक)

कल दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं का एकजुट होना यह बताता है कि यह पहला मौका है जब तृणमूल और कांग्रेस से लेकर लेफ्ट और क्षेत्रीय सहयोगियों तक, विपक्ष के तमाम दलों ने चुनाव आयोग को एक निष्पक्ष रेफरी के रूप में नहीं, बल्कि चुनावी धांधली में सीधे तौर पर शामिल एक पक्ष के रूप में देखा है। ममता बनर्जी का यह सीधा आरोप कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और उनकी "पूरी सॉफ्टवेयर टीम" ने वोटर्स के साथ धोखा किया है, और साथ ही ब्लॉक की तरफ से उन्हें तुरंत हटाने की मांग और संसद में मोशन लाने की तैयारी, एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है। अब विपक्ष बूथ स्तर की छिटपुट गड़बड़ियों पर बात करने के बजाय उस संस्थागत ढांचे को निशाना बना रहा है जिसके जरिए ये सब हुआ है। मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल में चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान को उस जरिया के तौर पर देखा जा रहा है जिसके तहत CEC की देखरेख में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए और फर्जी नाम जोड़े गए। (The Hindu, Google News India)

CEC ज्ञानेश कुमार / चुनाव आयोग

विपक्ष की तरफ से की जा रही आलोचना राजनीतिक असहमति को संस्थागत विफलता के रूप में पेश करती है। वे आयोग द्वारा कानून के किसी भी उल्लंघन का कोई खास उदाहरण नहीं दे पा रहे हैं, सिवाय उस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के जिसकी मांग खुद उन्होंने कई राज्यों में फूली हुई वोटर लिस्ट को साफ करने के लिए की थी। चुनाव आयोग, जनप्रतिनिधि कानून, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत रिवीजन का काम करता है, जिसमें ड्राफ्ट लिस्ट जनता की जांच के लिए पब्लिश की जाती है, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स द्वारा दावे और आपत्तियां सुनी जाती हैं, और फाइनल ऑर्डर के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के पास अपील की जा सकती है। यह एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) प्रक्रिया है जिसे विपक्ष अब संसद में मोशन लाकर CEC को हटाने की मांग करके बाईपास कर रहा है। किसी भी अदालत ने SIR अभियान पर रोक नहीं लगाई है; और न ही किसी इलेक्शन पिटीशन में "बड़े पैमाने पर नाम काटने" को सिस्टेमैटिक फ्रॉड साबित किया गया है, जबकि यह एक कानूनी प्रक्रिया के तहत होने वाला काम है। आयोग का काम सही वोटर लिस्ट तैयार करना है, न कि चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक सहमति बनाना।

विपक्ष (INDIA ब्लॉक) (खंडन)

आयोग का बचाव पूरी तरह से प्रक्रिया की औपचारिकता पर टिका है — जैसे जनप्रतिनिधि कानून, ड्राफ्ट लिस्ट, दावे और आपत्तियां — लेकिन विपक्ष का आरोप यही है कि इसी कानूनी ढांचे का गलत इस्तेमाल किया गया है। कल ममता बनर्जी का आरोप यह नहीं था कि SIR के पास कानूनी कवर नहीं था; बल्कि यह था कि ज्ञानेश कुमार के तहत काम करने वाली "पूरी सॉफ्टवेयर टीम" ने इसी कवर का फायदा उठाकर मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर नाम कटवाए और फर्जी नाम जुड़वाए, जिससे कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों को उनके वोट के अधिकार से वंचित करने के लिए किया गया। (The Hindu, Google News India)

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव इस मीटिंग से पहले ही बिहार पैटर्न का मुद्दा उठा चुके थे। कल INDIA ब्लॉक की एकजुटता (जिसमें TMC, कांग्रेस, लेफ्ट और क्षेत्रीय दल शामिल हैं) के बाद CEC को हटाने के लिए एक ड्राफ्ट पार्लियामेंट्री नोटिस तैयार किया गया है। इसका कारण यह है कि आयोग जिन अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) उपायों का हवाला देता है, वे तब बेअसर हो जाते हैं जब खुद अंपायर पर ही डिलीशन लॉजिक तय करने का आरोप लग रहा हो। (Google News India)

विपक्ष की मांग यह नहीं है कि EC चुनावी नतीजों पर "राजनीतिक सहमति बनाए", बल्कि यह है कि CEC आर्टिकल 324(5) के तहत उन्हें हटाने की शक्ति रखने वाली उसी संसद के सामने चार राज्यों में वोट चोरी के विशिष्ट आरोपों का जवाब दें।

CEC ज्ञानेश कुमार / चुनाव आयोग (निष्कर्ष)

विपक्ष का यह पलटवार मुख्य समस्या की पुष्टि करता है: वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में विशिष्ट और सत्यापित अनियमितताओं के आरोप लगाने से आगे बढ़कर, बिना किसी सिंगल फोरेंसिक ऑडिट, इलेक्शन पिटिशन या कोर्ट के आदेश के CEC की "पूरी सॉफ्टवेयर टीम" पर "सोची-समझी गई भारी-भरकम डिलीशन" का मकसद थोपने लगे हैं। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने बिहार का मुद्दा उठाया था; ममता बनर्जी ने अब तीन और राज्य जोड़ दिए हैं। लेकिन आर्टिकल 324(5) के तहत किसी संवैधानिक प्राधिकारी को हटाने के लिए साक्ष्य का पैमाना "साबित दुराचार या अक्षमता" (proved misbehaviour or incapacity) है, न कि सबूत मिलने से पहले तैयार किया गया कोई ड्राफ्ट पार्लियामेंट्री नोटिस। आयोग की अर्ध-न्यायिक मशीनरी — EROs, DEOs, CEOs और आखिरकार आर्टिकल 226 के तहत आने वाले हाई कोर्ट — का वजूद ही इसलिए है ताकि इन दावों की सबूतों के साथ जांच की जा सके। इसे दरकिनार करके राजनीतिक प्रस्ताव लाना यह बताता है कि विपक्ष जानता है कि कानूनी रिकॉर्ड इस बयानबाजी का साथ नहीं देगा।

नतीजा

मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार की "पूरी सॉफ्टवेयर टीम" पर बड़े पैमाने पर नाम हटाने और फर्जी नाम जुड़वाने का आरोप लगाते हुए, विपक्ष के नेता कल दिल्ली में एकत्र हुए और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की (The Hindu, Google News India)। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत वैधानिक अर्ध-न्यायिक सुरक्षा उपायों—ड्राफ्ट रोल, दावे और आपत्तियों, तथा अपीलों—के साथ किया गया था, और किसी भी अदालत ने इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है या इसमें कोई सिस्टमिक धोखाधड़ी नहीं पाई है। मुख्य सवाल यह है कि क्या विपक्ष का आर्टिकल 324(5) के तहत लाया जाने वाला ड्राफ्ट पार्लियामेंट्री प्रस्ताव, बिना किसी फोरेंसिक ऑडिट, इलेक्शन पिटिशन या उस आरोप को पुख्ता करने वाले कोर्ट ऑर्डर के "साबित दुराचार" के संवैधानिक पैमाने पर खरा उतर सकता है, जो यह कहता है कि वैधानिक प्रक्रिया का ही गलत इस्तेमाल किया गया था।

निष्कर्ष

Opposition leaders converged in Delhi yesterday to demand CEC Gyanesh Kumar's removal, alleging his "full software team" engineered mass deletions and bogus insertions during the Special Intensive Revision in Madhya Pradesh, Haryana, Bihar, and West Bengal (The Hindu, Google News India). The Election Commission counters that the SIR was conducted under the Representation of the People Act with statutory quasi-judicial safeguards — draft rolls, claims and objections, and appeals — and that no court has stayed the exercise or found systemic fraud. The load-bearing question is whether the Opposition's draft parliamentary motion under Article 324(5) can meet the constitutional standard of "proved misbehaviour" without a forensic audit, Election Petition, or court order substantiating the charge that the statutory process itself was weaponised.

  1. Mamata Banerjee reached Delhi on September 30, 2026 to participate in the INDIA bloc meeting.

    The Hindu
  2. Mamata Banerjee was accompanied by MPs Dola Sen and Kalyan Banerjee.

    The Hindu
  3. Mamata Banerjee said the target is the Chief Election Commissioner and his full software team who cheated and betrayed the people.

    The Hindu
  4. Mamata Banerjee said she has been addressing Gyanesh Kumar as 'Vanish Kumar'.

    The Hindu
  5. CPI(M) general secretary M.A. Baby reached out to Mamata Banerjee to forge unity on the special intensive revision of electoral rolls and the role of CEC Gyanesh Kumar.

    The Hindu
  6. Mamata Banerjee held talks with Congress leader Rahul Gandhi.

    The Hindu
  7. The Indian Express published an article titled 'EC played like puppets, Gyanesh Kumar a thief': Opposition fury at INDIA meet.

    Indian Express
  8. Mamata Banerjee said the INDIA bloc is 'very much united' and demanded immediate removal of CEC Gyanesh Kumar.

    Google News India
  9. Mamata Banerjee alleged serious electoral wrongdoing and manipulation of the electoral process.

    Google News India
  10. The opposition raised the issue of 'vote theft' in Madhya Pradesh, Haryana, Bihar and West Bengal.

    Google News India
  11. Rahul Gandhi and Tejashwi Yadav had raised the issue of vote theft in Bihar.

    Google News India
  12. Top leaders of the INDIA bloc met in Delhi on September 30, 2026 to discuss irregularities surrounding the SIR exercise.

    Google News India
  13. The primary agenda was to finalise an action plan for a joint protest against the EC and push for CEC Gyanesh Kumar's resignation.

    Google News India
  14. A draft notice has been prepared to introduce a motion in both Lok Sabha and Rajya Sabha for the CEC's removal.

    Google News India
उल्लिखित स्रोत

Google News India·Indian Express·The Hindu