क्या हमने आपको ग्राउंडेड रखा? हमें बताएँ ↓
रिपोर्ट1 स्रोत · 1 दावा सुरक्षित · 0 सत्यापितसामान्यसंख्या 18 / 21

फूड सेफ्टी रेड्स से पोस्ट-इंस्पेक्शन एनफोर्समेंट की चुनौतियों पर रोशनी

McDonald’s India responds to FDA action against its Colaba outlet after the food licence was suspended over reported food safety and hygiene violations. The company says it follows rigorous standards and is reviewing the observations. Get Latest News on Mumbai only on lokmattimes.com
McDonald’s India responds to FDA action against its Colaba outlet after the food licence was suspended over reported food safety and hygiene violations. The company says it follows rigorous standards and is reviewing the observations. Get Latest News on Mumbai only on lokmattimes.com Photo via Lokmattimes

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में रेस्तरां में की गई फूड सेफ्टी रेड्स ने फूड सर्विस इंडस्ट्री में हाइजीन और रेगुलेटरी कम्प्लायंस को लेकर लगातार बनी चिंताओं को उजागर किया है। आमतौर पर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की जाने वाली इन कार्रवाइयों का उद्देश्य फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन सुनिश्चित करना और ग्राहकों के लिए हेल्थ रिस्क को रोकना होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स और अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि लॉन्ग-टर्म फूड सेफ्टी बनाए रखने के लिए निरंतर एनफोर्समेंट (कार्रवाई) और मॉनिटरिंग व पेनल्टी से जुड़ी सिस्टम की कमियों को दूर करना बेहद अहम है। ये छापे हाल ही में हुई पब्लिक हेल्थ बहसों और मीडिया में सामने आए नॉन-कम्प्लायंस के मामलों के बाद पड़े हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में फूड सेफ्टी टीमों ने आज शहर भर के 50 से अधिक रेस्तरां में सरप्राइज इंस्पेक्शन किए, जिसके तहत एक्सपायरी मसाले, बिना लेबल वाले पैकेज्ड फूड और गलत तरीके से स्टोर किया गया मीट जब्त किया गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों ने पुष्टि की कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 का उल्लंघन करने के लिए 12 भोजनालयों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए, जबकि गंभीर हाइजीन उल्लंघनों के कारण तीन आउटलेट्स को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

इस हफ्ते की शुरुआत में शुरू किए गए राज्यव्यापी अभियान के हिस्से के रूप में इन छापों में अंधेरी, बांद्रा और लोअर परेल जैसे इलाकों में स्ट्रीट फूड स्टॉल से लेकर मिड-स्केल रेस्तरां तक के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इंस्पेक्टर्स को कई तरह के उल्लंघन मिले, जिनमें एक्सपायरी मसालों का इस्तेमाल, सही रेफ्रिजरेशन की कमी और अस्वच्छ कुकिंग कंडीशंस शामिल थीं। BMC के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि शक के दायरे में आए मिलावटी खाने के सैंपल जांच के लिए सरकारी लैब में भेज दिए गए हैं, और रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर आने की उम्मीद है।

यह कार्रवाई पूरे भारत में धड़ल्ले से हो रहे फूड सेफ्टी उल्लंघनों की मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुई पब्लिक हेल्थ बहसों के बीच आई है। जून में, द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में सामने आया था कि दिल्ली और मुंबई में सर्वे किए गए लगभग 40% रेस्तरां बेसिक हाइजीन स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद सख्त एनफोर्समेंट की मांग उठी। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि हालांकि इस तरह के छापे जरूरी हैं, लेकिन ये अक्सर सिस्टम से जुड़ी कमियों को दूर किए बिना एक अस्थायी उपाय साबित होते हैं। फूड सेफ्टी कंसल्टेंट डॉ. रवि कुमार ने कहा, “असली चुनौती लगातार मॉनिटरिंग और ऐसी पेनल्टी लगाने की है जो बार-बार नियम तोड़ने वालों को डराए। इंस्पेक्शन कम होते ही कई रेस्तरां पुरानी हरकतों पर लौट आते हैं।”

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अपने रेगुलेटरी ढांचे में कमियों को स्वीकार किया है, जिसमें रेगुलर इंस्पेक्शन के लिए स्टाफ की कमी और नियमों का पालन न करने पर हल्की पेनल्टी शामिल हैं। 2025 के एक सरकारी ऑडिट में पाया गया कि महाराष्ट्र में 60% से अधिक फूड सेफ्टी ऑफिसर अपनी क्षमता से अधिक मामलों को संभाल रहे हैं, जिससे चुनिंदा जगहों पर ही कार्रवाई हो पाती है। दूसरी ओर, इंडस्ट्री से जुड़े समूहों का तर्क है कि छोटे व्यवसायों के पास अक्सर कम्प्लायंस बनाए रखने के लिए संसाधन नहीं होते, जिससे ट्रेनिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट की जरूरत पर जोर मिलता है।

जैसे-जैसे अधिकारी हालिया उल्लंघनों के लिए पेनल्टी को अंतिम रूप दे रहे हैं, स्टेकहोल्डर्स लॉन्ग-टर्म समाधानों को लेकर बंटे हुए हैं। जहां कुछ लोग भारी जुर्माने और अनिवार्य सर्टिफिकेशन प्रोग्राम्स की वकालत करते हैं, वहीं अन्य लोग प्रतिष्ठानों पर स्टैंडर्ड्स बनाए रखने का दबाव बनाने के लिए पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन की जरूरत पर जोर देते हैं। सुधार के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा न होने के कारण, आज के छापों—और देश भर में इस तरह के अन्य अभियानों—की प्रभावशीलता अनिश्चित बनी हुई है।

उल्लिखित स्रोत

Indian Express