NDA सरकार 2029 में 22 राज्यों और UTs में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर कर रही विचार
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ चुनाव कराने की योजना का मूल्यांकन कर रही है।

NDA सरकार अपने "एक देश, एक चुनाव" (One Nation, One Election) अभियान के तहत 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ-साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस योजना को विचार-विमर्श के लिए पटल पर रखा गया है, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों के चुनावी चक्र को राष्ट्रीय चुनावों के साथ जोड़ना है (Indian Express)।
इस प्रस्ताव में एक ऐसे फ्रेमवर्क की रूपरेखा तैयार की गई है जिसके तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव 2029 में लोकसभा के साथ ही कराए जाएंगे, बशर्ते उनका कार्यकाल निर्धारित राष्ट्रीय चुनाव के समय के साथ मेल खाता हो। यदि इसे लागू किया जाता है, तो इस सिंक्रनाइज़ेशन से देश भर में चुनावों की बारंबारता कम हो जाएगी, जहाँ वर्तमान में अलग-अलग समय पर कार्यकाल समाप्त होने के कारण कई चरणों में अलग-अलग राज्यों के चुनाव होते हैं (Indian Express)।
भारत में एक साथ चुनाव कराने के विचार पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे प्रशासनिक बोझ और मतदाताओं की थकान कम होती है, जबकि आलोचक लॉजिस्टिक से जुड़ी चुनौतियों और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता के संभावित रूप से प्रभावित होने को लेकर चिंता जताते हैं। हालांकि, मौजूदा प्रस्ताव इस अवधारणा को दो दर्जन से अधिक क्षेत्रों को शामिल करते हुए बड़े पैमाने पर अमली जामा पहनाने की दिशा में एक ठोस कदम है (Indian Express)।
राज्य सरकारों और चुनाव आयोग के बीच समन्वय सहित इस योजना की व्यावहारिकता (feasibility) से जुड़े विवरण अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं। राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक आम सहमति इसके क्रियान्वयन के लिए बेहद अहम साबित होगी। फिलहाल, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने या विचार-विमर्श शुरू करने के लिए कोई आधिकारिक समय-सीमा (timeline) सामने नहीं आई है (Indian Express)।
इतने बड़े पैमाने पर चुनावी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से लागू करने को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, खासकर उन राज्यों में जहाँ विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 के लोकसभा शेड्यूल से मेल नहीं खाता है। सरकार ने अभी तक इस बात पर कुछ नहीं कहा है कि वह इन असमानताओं को कैसे दूर करेगी या इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कानूनी या संवैधानिक संशोधन (amendments) किए जाएंगे या नहीं (Indian Express)।

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