सज्जन कुमार वाले बयान पर सिख प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का पुतला फूंका

1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिवारों सहित सिख समुदाय के 200 से अधिक प्रतिनिधि शनिवार दोपहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास के पास एकत्र हुए। उन्होंने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को "पार्टी का रोल मॉडल" बताने वाले कथित बयानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी का पुतला फूंका और उस पर चप्पलें बरसाईं (The Hindu)। यह प्रदर्शन 1984 के दंगों के सिलसिले में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार की 20 अगस्त 2026 को हुई मौत के दो दिन बाद हुआ। प्रदर्शनकारियों ने उस बात पर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया जिसे उन्होंने कुमार का महिमामंडन करार दिया। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़की हिंसा में अपनी भूमिका के लिए कुमार को 2018 में सजा सुनाई गई थी।
गांधी के दिल्ली स्थित आवास के पास दोपहर में हुए इस प्रदर्शन में सिख समुदाय के दूर-दूर से लोग शामिल हुए। इनमें से कई लोगों के पास तख्तियां थीं जिनमें कथित बयानों की निंदा की गई थी और 1984 के दंगों के लिए जवाबदेही की मांग की गई थी (The Hindu)। उपस्थित लोगों द्वारा शेयर किए गए फुटेज में कांग्रेस पार्टी के इस मुद्दे पर कथित रुख की आलोचना करने वाले नारों के बीच पुतले को आग के हवाले किया जाता हुआ देखा गया। हालांकि "रोल मॉडल" वाली टिप्पणी का सटीक स्रोत अभी भी असत्यापित है, लेकिन आयोजकों का दावा है कि इसे हालिया बयानों में कांग्रेस पदाधिकारियों से जोड़ा गया था, जिससे सोशल मीडिया पर और समुदाय के नेताओं के बीच व्यापक निंदा शुरू हो गई।
पूर्व सांसद सज्जन कुमार को दिसंबर 2018 में एक स्पेशल कोर्ट ने 1984 के दंगों के दौरान सिखों की हत्या की साजिश रचने के मामले में दोषी ठहराया था, जिसमें अकेले दिल्ली में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे (The Hindu)। उन्होंने सजा सुनाए जाने से पहले 2018 में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन वह पीड़ितों के परिवारों और बचे हुए लोगों के लिए एक विवादित शख्सियत बने रहे। इस हफ्ते हुई उनकी मौत ने दंगा पीड़ितों के लिए न्याय को लेकर बहस को फिर से हवा दे दी है, और कई लोगों ने हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में देरी पर सवाल उठाए हैं।
यह प्रदर्शन 1984 के दंगों को लेकर कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक रवैये पर बनी रहने वाली उस तनातनी को उजागर करता है जो भारतीय राजनीति का एक संवेदनशील अध्याय है। हालांकि पार्टी ने मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों से दूरी बना ली है, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि इसके नेतृत्व ने औपचारिक माफी या मुआवजे की मांगों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया है। राहुल गांधी, जिन्हें इस मुद्दे पर अपनी पार्टी की विरासत को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है, ने प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
रविवार तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि कांग्रेस पार्टी की प्रदर्शनकारियों की मांगों को संबोधित करने या अपने सदस्यों से जुड़े बयानों के संदर्भ को स्पष्ट करने की कोई योजना है। यह घटना इस बात पर भी सवाल उठाती है कि 1984 की हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय और समापन की मांग कर रहे सिख समूहों के चल रहे प्रयासों के बीच राजनीतिक दल ऐतिहासिक शिकायतों से कैसे निपटते हैं।


The Hindu