चेन्नई MRTS का मेट्रो रेल सिस्टम में होगा मर्जर

आज (20 अगस्त 2026) यह घोषणा की गई कि चेन्नई का
चेन्नई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने आज शहर के मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) को अपने मौजूदा मेट्रो रेल नेटवर्क के साथ एकीकृत करने की घोषणा की। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से कामकाज सुगम होगा और यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। The Indian Express द्वारा कल दी गई खबर के अनुसार, यह फैसला चेन्नई की suburban रेल और मेट्रो सेवाओं को एक ही autoridad के तहत लाने की दिशा में एक अहम कदम है।
मर्जर के पूरी तरह लागू होने के बाद यात्री टिकटिंग सिस्टम, कनेक्टिविटी के विकल्पों और सर्विस कोऑर्डिनेशन में बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं। फिलहाल MRTS 16.1 किलोमीटर के कॉरिडोर पर 17 स्टेशनों का संचालन करता है, जबकि मेट्रो 42 किलोमीटर में फैले 35 स्टेशनों को कवर करती है। नए ढांचे के तहत, दोनों नेटवर्क एक साझा किराया प्रणाली का इस्तेमाल करेंगे, जिससे यात्री बिना किसी परेशानी के सफर के लिए एक ही स्मार्ट कार्ड या मोबाइल पेमेंट का उपयोग कर सकेंगे। अधिकारियों ने फीडर सेवाओं के जरिए टाइम टेबल को सिंक करने और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की योजनाओं पर भी जोर दिया। (Indian Express)
चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "इस एकीकरण से संचालन संबंधी अड़चनें खत्म होंगी और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित हो सकेगा।" उन्होंने कहा, "यात्रियों को कम इंतजार करना पड़ेगा और MRTS तथा मेट्रो लाइनों के बीच आना-जाना ज्यादा आसान होगा।" इस मर्जर से मेंटेनेंस और बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन का काम भी एक जगह से संभाला जाएगा, जिन्हें फिलहाल अलग-अलग मैनेज किया जाता है। (Indian Express)
MRTS ने 2005 में संचालन शुरू किया था, लेकिन 2017 में शुरू किए गए नए मेट्रो नेटवर्क के साथ इसके ठीक से इंटीग्रेट न होने को लेकर लंबे समय से इसकी आलोचना होती रही है। हालांकि दोनों सिस्टम प्रमुख कमर्शियल और रेजिडेंशियल इलाकों को सेवा देते हैं, लेकिन उनकी अलग टिकटिंग और ऑपरेशनल स्ट्रक्चर ने अक्सर यात्रियों को उलझन में डाला है। जानकारों का तर्क है कि नेटवर्क का यह मर्जर अर्बन ट्रांजिट के वैश्विक मानकों के अनुकूल है, जहां एकीकृत प्रणालियां प्रशासनिक लागत को कम करती हैं और यात्रियों की संख्या बढ़ाती हैं। (Indian Express)
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। एकीकृत टिकटिंग सिस्टम को लागू करने और सेवाओं को सिंक करने की समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया है, जिससे ट्रांजिशन पीरियड के दौरान संभावित परेशानियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि मौजूदा MRTS स्टाफ को मेट्रो प्रशासन में कैसे शामिल किया जाएगा या किराए के ढांचे में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं। (Indian Express)
जैसे-जैसे चेन्नई की आबादी बढ़ रही है और शहर का दायरा फैल रहा है, यह मर्जर सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के शहर के प्रयासों को रेखांकित करता है। फिर भी, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लॉजिस्टिक अड़चनों को कैसे दूर किया जाता है और इन नेटवर्क्स पर निर्भर रहने वाले रोजाना के 2 लाख से ज्यादा यात्रियों को कम से कम असुविधा हो, यह कैसे सुनिश्चित किया जाता है। (Indian Express)


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