भारत ने महिला हॉकी वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया

महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की 6-1 की शानदार जीत टूर्नामेंट में उनकी मजबूत शुरुआत को दर्शाती है, जिसमें छह अलग-अलग खिलाड़ियों ने गोल करके टीम की गहराई साबित की है। इस नतीजे से न सिर्फ दो मैचों के बाद पूल डी में भारत का शीर्ष स्थान पक्का हो गया है, बल्कि उनका गोल अंतर भी काफी बेहतर हो गया है, जो इंग्लैंड के खिलाफ अगले मैच से पहले एक अहम टाईब्रेकर साबित होगा। यह प्रदर्शन इस हफ्ते की शुरुआत में हुए उनके पहले मैच के बाद आया है, जिससे ग्रुप चरण के कड़े मुकाबलों से पहले टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। (Sources: google_news_india, the_hindu, Sportstar)
भारतीय महिला हॉकी टीम ने कल नीदरलैंड के अम्सटेवीन स्थित वैगेनर स्टेडियन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की शानदार जीत दर्ज की। चीन द्वारा इंग्लैंड को 4-2 से उलटफेर का शिकार बनाने के बाद भारत ने इस नतीजे का फायदा उठाते हुए महिला हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के पूल डी में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। भारत की तरफ से छह अलग-अलग खिलाड़ियों ने गोल किए। इस जीत से न सिर्फ इतिहास में जीत का सबसे बड़ा अंतर दर्ज हुआ, बल्कि गुरुवार को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले से पहले टीम बेहतर स्थिति में पहुंच गई है।
भारतीय दबदबे की नींव पहले ही क्वार्टर में पड़ गई थी, जहां शुरुआती लड़खड़ाहट के बावजूद किस्मत ने उनका साथ दिया। दक्षिण अफ्रीका की कायला डी वाल ने चौथे मिनट में गोलकीपर बिचू देवी खारीबाम की परीक्षा ली, लेकिन भारत ने 11वें मिनट में अपने पहले ही दमदार हमले का फायदा उठाया। साक्षी राणा के पास के बाद मिले ढीले बॉल का फायदा उठाते हुए सुनेलिता टोप्पो ने पहला शॉट रोके जाने के बाद स्लाइड करके गोल किया और खाता खोला। इस गोल से खिलाड़ियों का दबाव कम हुआ और भारत ने 17वें मिनट में नवनीत कौर के जरिए अपनी बढ़त को दोगुना कर दिया। नवनीत ने पेनल्टी कॉर्नर पर बेहतरीन एंगल बनाते हुए दक्षिण अफ्रीकी डिफेंस को छकाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया।
सुशीला चानू, जिन्हें आमतौर पर गोल करने के लिए नहीं जाना जाता, उन्होंने 25वें मिनट में तीसरा गोल दागा। उन्होंने दीपिका के ड्रैग-फ्लिक पर डिफेंडर से टकराकर आए रिबाउंड को गोल में बदला। इसके बाद भारतीय टीम ने तीसरे क्वार्टर में शानदार खेल दिखाते हुए छह मिनट के भीतर तीन गोल दागे। बलजीत कौर और नवनीत के मूव को आगे बढ़ाते हुए दीपिका ने शॉट को बॉटम कॉर्नर में पहुंचाया, जबकि उसी दिन अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित लालरेम्सियामी ने दाहिने विंग से कड़े एंगल पर शानदार गोल किया। 18 साल की साक्षी राणा ने नेट के ऊपरी हिस्से में जोरदार शॉट मारकर इस सिलसिले को खत्म किया, जो टीम की बेंच स्ट्रेंथ को साबित करता है।
दक्षिण अफ्रीका की टीम कमजोर साबित होने के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं थी। उन्होंने आखिरी क्वार्टर में डी वाल के जरिए पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर एक गोल कम किया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने पांच गोल की बढ़त को अंत तक बनाए रखा। वर्ल्ड कप के इतिहास में भारत की यह सबसे बड़ी जीत है, जिससे उनका गोल अंतर +5 हो गया है, जो इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले से पहले एक अहम टाईब्रेकर है। पूल डी में दो मैचों में चार अंकों के साथ शीर्ष पर मौजूद रहने के कारण, उस मैच में एक ड्रॉ भी उन्हें अगले दौर में पहुंचाने के लिए काफी होगा।
टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेलने के बाद भारत का यह प्रदर्शन आया है, जहां दो बार बढ़त बनाने के बावजूद उन्होंने आखिर में गोल खाए थे। कोच सोर्ड मारिजने की टीम ने अब यह दिखा दिया है कि उनमें जुझारूपन के साथ-साथ अटैक करने के कई तरीके भी हैं, जहां नवनीत और लालरेम्सियामी जैसे खिलाड़ी दबाव में सूझबूझ और क्रिएटिविटी का शानदार मेल दिखाते हैं। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के इक्का-दुक्का हमलों के मुकाबले इंग्लैंड का आक्रामक खेल ज्यादा कड़ी चुनौती पेश कर सकता है, इसलिए मजबूत टीमों के खिलाफ लगातार फोकस बनाए रखने की टीम की क्षमता की अभी असली परीक्षा बाकी है।
जैसे-जैसे भारत गुरुवार के अहम मुकाबले के लिए तैयारी कर रहा है, टीम की इस बात पर कड़ी नजर रहेगी कि वह अटैक के अपने जज्बे और डिफेंस के अनुशासन के बीच कितना संतुलन बना पाती है। हालांकि कल के नतीजे ने उनकी उम्मीदों को पंख दिए हैं, लेकिन टूर्नामेंट का ग्रुप स्टेज अभी भी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, और इंग्लैंड की चीन के खिलाफ हार ने पूल डी के समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है। जो बात साफ है, वह यह है कि भारत का आगे का सफर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दिखाई गई उस पैनी और सटीक खेल शैली को दोहराएं, जिसने प्रतिद्वंद्वी टीम को नेस्तनाबूद कर दिया था, साथ ही उन कमियों को भी दूर करें जिनकी वजह से विरोधी टीम को वापसी की थोड़ी बहुत उम्मीद मिल गई थी।


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