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गुजरात प्रशासन ने 700 किलो लाल चटनी ज़ब्त की

Palanpur, Aug 18 (PTI) Gujarat’s food and drugs authority on Tuesday turned up the heat, seizing 700 kg of “adulterated” red chutney from a provision store in Banaskantha district during an inspection drive, officials said. Gujarat Food and Drugs Control Administration (FDCA), in a statement, said t
Palanpur, Aug 18 (PTI) Gujarat’s food and drugs authority on Tuesday turned up the heat, seizing 700 kg of “adulterated” red chutney from a provision store in Banaskantha district during an inspection drive, officials said. Gujarat Food and Drugs Control Administration (FDCA), in a statement, said t

गुजरात के अधिकारियों ने आज अहमदाबाद में एक स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट पर छापेमारी के दौरान मिलावट के संदेह में 700 किलो लाल चटनी ज़ब्त की, जिसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने घटिया खाद्य उत्पादों की पहचान के लिए जनता के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। राज्य के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट और स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए इस अभियान से पहले व्यावसायिक रूप से बिकने वाली चटनी की खेप में क्वालिटी की एकरूपता न होने की शिकायतें मिली थीं।

द प्रकाशित रिपोर्ट ने बताया कि ज़ब्त की गई खेप अस्वच्छ परिस्थितियों में रखी हुई पाई गई, और शुरुआती जांच से पता चला कि इसमें आर्टिफिशियल कलर और अत्यधिक प्रिजर्वेटिव्स के जरिए मिलावट की गई है। अधिकारियों ने हानिकारक योजकों (एडिटिव्स) की मौजूदगी की पुष्टि के लिए सैंपल लैबोरेटरी विश्लेषण के लिए भेज दिए हैं। इस बीच, अखबार ने ऐसे व्यावहारिक उपाय बताए जिन्हें अपनाकर उपभोक्ता घर पर ही मिलावट का पता लगा सकते हैं। इनमें रंग में अप्राकृतिक चमक, असामान्य गाढ़ापन (चिपचिपाहट) या बहुत तेज केमिकल की गंध की जांच करना शामिल है।

लाल चटनी भारतीय व्यंजनों में एक मुख्य सामग्री है, जो इसकी व्यापक मांग और इमली तथा मसालों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों की ऊंची कीमत के कारण मिलावट के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। लेख में उद्धृत विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मुनाफा कमाने के लिए बेईमान निर्माता अक्सर असली सामग्रियों की जगह सस्ते, सिंथेटिक विकल्प मिला देते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे ऐसी चीजों को प्राथमिकता दें जिन पर मैन्युफैक्चरिंग की तारीख और सामग्री की सूची जैसी जानकारियां स्पष्ट रूप से लिखी हों, और बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं से खरीदारी करने से बचें।

यह घटना पूरे भारत में फूड सेफ्टी रेगुलेशन से जुड़ी बड़ी चुनौतियों को उजागर करती है, जहां कमजोर प्रवर्तन तंत्र और सीमित जन जागरूकता के कारण बिना रेगुलेशन वाले प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलता है। गुजरात के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने पिछले कुछ महीनों में छोटे पैमाने की प्रोसेसिंग यूनिट्स का निरीक्षण बढ़ा दिया है, हालांकि कार्यकर्ताओं का तर्क है कि ऐसी प्रथाओं को व्यवस्थित रूप से रोकने के लिए सख्त दंड और बेहतर उपभोक्ता शिक्षा की आवश्यकता है।

फिलहाल, इस ज़ब्ती के सिलसिले में किसी की गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की गई है और अधिकारियों ने शामिल ब्रांडों के नामों का खुलासा नहीं किया है। एक सप्ताह के भीतर आने वाले लैबोरेटरी परिणामों से यह तय होगा कि Food Safety and Standards Act के तहत आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे या नहीं।