ई. कोलाई (E. Coli) मिलने के बाद इंडियन रेलवे ने दिए फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने के आदेश
कल इंडियन रेलवे ने कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में स्टेशन के पीने के पानी में ई. कोलाई मिलने के बाद 20,000 जगहों पर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की योजनाओं का ऐलान किया।

रविवार, 16 अगस्त को इंडियन रेलवे ने कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) द्वारा रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की सप्लाई में ई. कोलाई बैक्टीरिया का पता लगाए जाने के बाद अपने नेटवर्क में 20,000 जगहों पर वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की देशव्यापी पहल का ऐलान किया (Indian Express)। इस कदम को "बड़ा अपग्रेड" बताया गया है, जिसका मकसद दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में से एक में पानी की क्वालिटी को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना है।
CAG की ऑडिट, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई, उसमें पानी के उन सैंपल्स में ई. कोलाई की मौजूदगी पाई गई जो रेलवे स्टेशनों से इकट्ठा किए गए थे—यह एक ऐसा बैक्टीरिया है जो आमतौर पर मल के संदूषण (fecal contamination) से जुड़ा होता है। हालांकि रिपोर्ट में प्रभावित स्टेशनों की संख्या या संदूषण (contamination) की सटीक समयसीमा का जिक्र नहीं किया गया, लेकिन इसने पूरे नेटवर्क में पीने योग्य पानी के मानकों को बनाए रखने में व्यवस्थागत कमियों को उजागर किया (Indian Express)। इंडियन रेलवे, जो रोजाना लाखों पैसेंजर्स को सर्विस देता है, उसे पानी की क्वालिटी को लेकर बार-बार शिकायतों का सामना करना पड़ा है, हालांकि माइक्रोबियल संदूषण से जुड़ी यह पहली बड़े पैमाने की पहल है।
आने वाले महीनों में लगाए जाने वाले ये फिल्ट्रेशन सिस्टम स्टेशनों, हॉल्टिंग पॉइंट्स और मेंटेनेंस फैसिलिटीज को कवर करेंगे। अधिकारियों ने प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत या इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ये अपग्रेड नेशनल हेल्थ गाइडलाइंस के मुताबिक काम करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा हैं। यह पहल रेलवे के हालिया कैपिटल एक्सपेंचर प्लान्स के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण की कड़ी में आई है, हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार मेंटेनेंस और मॉनिटरिंग बेहद जरूरी होगी (Indian Express), (Indian Express)।
पब्लिक वाटर सप्लाई में ई. कोलाई की मौजूदगी से पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं, खासकर भीड़भाड़ वाले ट्रांजिट हब्स में जहां पीने के दूसरे विकल्पों तक पहुंच सीमित हो सकती है। हालांकि CAG की भूमिका में आमतौर पर फाइनेंशियल और प्रक्रिया से जुड़े ऑडिट शामिल होते हैं, लेकिन पब्लिक हेल्थ असेसमेंट में इसका दायरा बढ़ना भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में संस्थागत जवाबदेही पर बढ़ती कड़ी नजर को दर्शाता है।
सोमवार, 17 अगस्त तक इंडियन रेलवे ने फिल्ट्रेशन इंस्टॉलेशन पूरा करने की समयसीमा या 20,000 जगहों के चयन के मानदंडों पर कोई डिटेल शेयर नहीं की है। पैसेंजर एडवोकेसी ग्रुप्स ने पानी की क्वालिटी में सुधार को लेकर ट्रांसपेरेंट रिपोर्टिंग की मांग की है, जबकि कुछ स्टेशन मास्टर ने पुरानी हो चुकी इंफ्रास्ट्रक्चर को रेट्रोफिट करने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों को लेकर निजी तौर पर चिंता जताई है। नए सिस्टम्स की सफलता काफी हद तक टेक्निकल एक्जीक्यूशन और लगातार हो रही निगरानी दोनों पर निर्भर करेगी।


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