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केरल की तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस अब 16 कोच के साथ दौड़ेगी

वंदे भारत एक्सप्रेस, जो भारत की सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन सेवा है, अपनी शुरुआत से ही देश के रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के प्रयासों का एक मुख्य केंद्र रही है। केरल की तीसरी वंदे भारत सेवा, जिसने नौ महीने पहले परिचालन शुरू किया था, अब 16 कोच में अपग्रेड कर दी गई है, जो इसकी क्षमता और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है। यह विकास राज्य में कनेक्टिविटी और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने की व्यापक पहलों के अनुरूप है, खासकर उन रूटों पर जो स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों दोनों की सेवा करते हैं। यह अपग्रेड ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में कुशल और हाई-स्पीड रेल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

कल, केरल की तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस को, जो राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को मंदिर शहर कोल्लम से जोड़ती है, 16 कोच में अपग्रेड कर दिया गया। इसके साथ ही, इसके पहले परिचालन के नौ महीने बाद इसकी क्षमता और सर्विस में एक बड़ा इजाफा हुआ है। भारतीय रेलवे द्वारा पुष्टि किया गया यह अपग्रेड, 84 किलोमीटर लंबे इस रूट पर बढ़ते यात्री तनाव को पूरा करने और यात्रा को सुविधाजनक बनाने के प्रयासों को दर्शाता है, जो रोजाना सफर करने वाले यात्रियों और पर्यटकों दोनों के काम आता है (Indian Express)।

सितंबर 2025 से चालू, तिरुवनंतपुरम-कोल्लम वंदे भारत सेवा शुरू में 14 कोच के साथ चलाई गई थी, जो भारत के रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए लाई गई सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए एक मानक कॉन्फ़िगरेशन है। दूसरे पावर कार सहित दो और कोच जुड़ जाने से इसकी बैठने की क्षमता में लगभग 15% की वृद्धि हुई है, जो इस रूट की बढ़ती लोकप्रियता के अनुकूल है। यह ट्रेन, जो मोड़ों पर अपनी टिल्टिंग तकनीक और तेज रफ्तार के लिए जानी जाती है, दक्षिणी केरल के शहरी केंद्रों और तीर्थ स्थलों के बीच बेहतरीन कनेक्टिविटी चाहने वाले लोगों के लिए यात्रा का एक पसंदीदा जरिया बन गई है (Indian Express)।

यह विकास क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और पैसेंजर एक्सपीरियंस को प्राथमिकता देने के लिए भारतीय रेलवे की व्यापक पहलों को रेखांकित करता है। केरल, अपने घने रेल नेटवर्क और भारी संख्या में पर्यटकों के आने के कारण, इस तरह के अपग्रेड के लिए एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में उभरा है। वंदे भारत बेड़े (फ्लीट), जिसमें अब देश भर में 60 से अधिक ट्रेनें शामिल हैं, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रगति में आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अधिकांश कंपोनेंट देश के भीतर ही बनाए जाते हैं। विशेष रूप से केरल सेवा को तिरुवनंतपुरम और कोल्लम के बीच यात्रा के समय को तीन घंटे से अधिक के मुकाबले घटाकर दो घंटे से भी कम करने में इसकी भूमिका के लिए सराहा गया है, जो पारंपरिक ट्रेनों से काफी कम है (Indian Express)।

हालाँकि यह अपग्रेड मौजूदा मांग को पूरा करता है, लेकिन ऐसी सेवाओं को बढ़ाने में अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेड में देरी, जैसे कि पटरियों का विद्युतीकरण और स्टेशनों का आधुनिकीकरण, इस क्षेत्र में हाई-स्पीड रेल की पूरी क्षमता को सीमित कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्नत वंदे भारत बेड़े के रखरखाव के लिए विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जिनका देश भर में अभी विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल, तिरुवनंतपुरम-कोल्लम रूट के यात्रियों को अधिक सीटें मिलेंगी और संभवतः प्रतीक्षा समय भी कम होगा, हालाँकि आगे के सुधार केरल के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में चल रहे निवेश पर निर्भर करेंगे (Indian Express)।

उल्लिखित स्रोत

Indian Express