बयानों में विरोधाभास का हवाला देते हुए कोर्ट ने बृज भूषण को बरी किया

कल एक अदालत ने बृज भूषण को बरी कर दिया और पीड़ितों द्वारा दी गई "गलत" जानकारियों को अभियोजन पक्ष के मामले में एक बड़ी खामी बताया, जिसके चलते केस कमजोर पड़ गया। सोमवार को सुनाए गए फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि पीड़ितों के बयानों में अशुद्धियां किसी भी अपराध को संदेह से परे साबित करने में "घातक" साबित हुईं (Indian Express)।
अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से उन कथित पीड़ितों के बयानों के आधार पर अपनी दलीलें तैयार की थीं, जिन्होंने बृज भूषण से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया था। हालांकि, कोर्ट ने उनके बयानों में कई विसंगतियां पाईं, जिनमें समय, स्थान और घटनाओं के क्रम में अंतर शामिल था। कोर्ट ने पाया कि इन अशुद्धियों ने अभियोजन पक्ष के दावों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा कर दिया। अदालत ने कहा, "अभियोजन पक्ष का मामला पीड़ितों के बयानों पर टिका है, जो विरोधाभासों और अशुद्धियों से भरे हुए हैं।" अदालत ने यह भी जोड़ा कि ऐसी गलतियों ने सजा सुनाने के लिए जरूरी साक्ष्य आधार को "बुरी तरह कमजोर" कर दिया (Indian Express)।
बृज भूषण की कानूनी टीम ने दलील दी थी कि ये आरोप गलतफहमी और नाकाफी सबूतों पर आधारित हैं। बचाव पक्ष ने जांच में कमियों का जिक्र किया, जिसमें पीड़ितों के दावों का समर्थन करने वाले पुख्ता भौतिक साक्ष्यों की कमी भी शामिल थी। कोर्ट का यह फैसला इन दलीलों के अनुकूल नजर आता है, क्योंकि उसे अभियोजन पक्ष के सबूत अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं लगे। जब तक अभियोजन पक्ष इस फैसले के खिलाफ अपील करने का फैसला नहीं करता, तब तक इस बरी होने के साथ ही कानूनी कार्यवाही समाप्त हो जाती है (Indian Express)।
यह मामला अदालतों के सामने गवाही के आधार पर साक्ष्यों का मूल्यांकन करने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करता है, खासकर उन मामलों में जहां भौतिक सबूत मौजूद न हों या अनिर्णायक हों। हालांकि अभियोजन पक्ष का कहना था कि पीड़ितों के बयान भरोसेमंद थे, लेकिन अदालत का यह फैसला आपराधिक मामलों में साबित करने के कड़े मानदंडों को उजागर करता है। अभी यह साफ नहीं है कि अभियोजन पक्ष इस फैसले को चुनौती देगा या नहीं, क्योंकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है (Indian Express)।


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