सीबीआई ने हरियाणा के आईएएस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए

'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सोने के सिक्कों और मुजरा पार्टियों में शामिल होने के मामले में हरियाणा के आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आरोप दायर किए हैं। यह मामला राज्य प्रशासन में तैनात वरिष्ठ सिविल सेवकों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता है।
'द इंडियन एक्सप्रेस' द्वारा बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने आरोप लगाया है कि हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के एक नेटवर्क के तहत सोने के सिक्के स्वीकार किए और मुजरा पार्टियों में हिस्सा लिया। केंद्रीय एजेंसी के इन आरोपों में राज्य प्रशासन में तैनात सिविल सेवकों द्वारा अवैध रूप से रिश्वत लेने के तौर-तरीकों का विवरण दिया गया है।
रिपोर्ट में बताए गए सीबीआई के निष्कर्षों के अनुसार, ऐसे मामलों का जिक्र है जहां अधिकारियों को कथित तौर पर घूस के रूप में सोने के सिक्के पहुंचाए गए थे। जांच में उन निजी मनोरंजन कार्यक्रमों में अधिकारियों के शामिल होने की बात भी सामने आई है, जिन्हें विशेष रूप से मुजरा पार्टियों के रूप में चित्रित किया गया है, और जहां सरकारी फैसलों में निहित स्वार्थ रखने वाले लोगों द्वारा कथित तौर पर उनकी मेहमाननवाजी की गई थी। एजेंसी का तर्क है कि ये कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन हैं।
इन आरोपों में जिन अधिकारियों के नाम हैं, वे हरियाणा कैडर में महत्वपूर्ण पदों पर हैं या रह चुके हैं, जिसके चलते उनके पास पोस्टिंग, ठेकों और विनियामक मंजूरियों से जुड़े मामलों में विवेकाधीन शक्तियां थीं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट बताती है कि सीबीआई ने ऐसे दस्तावेजी और गवाही पर आधारित सबूत जुटाए हैं, जो कीमती सामानों के लेन-देन और इन आयोजनों में शामिल होने को आयोजकों के पक्ष में किए गए विशिष्ट आधिकारिक फैसलों से जोड़ते हैं। समझा जाता है कि एजेंसी रिश्वत के इस लेन-देन का पता लगाने के लिए बैंक लॉकर के रिकॉर्ड और बातचीत के लॉग (कम्युनिकेशन लॉग) की जांच कर रही है।
हरियाणा की नौकरशाही पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन वर्तमान आरोपों का यह खास स्वरूप — जिसमें सर्राफा भुगतान के साथ-साथ पारंपरिक मनोरंजन का भी जिक्र है — सेवारत अखिल भारतीय सेवा (All India Service) के अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई के रुख में एक तीखा तेवर दिखाता है। बुधवार तक राज्य सरकार की ओर से सीबीआई डोजियर के विशिष्ट विवरणों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उम्मीद की जा रही है कि एजेंसी सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी मांगेगी, जो राज्य के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ इस मामले को आगे बढ़ाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा लेने वाला एक प्रक्रियात्मक कदम होगा।


Indian Express