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जर्मनी की डी-एस्केलेशन की अपील ठुकराने के बाद यूक्रेन में रूसी हमलों में दो की मौत

Russian Foreign Minister Sergei Lavrov met with his German counterpart at the UN General Assembly where Moscow dismissed de-escalation calls.
Russian Foreign Minister Sergei Lavrov met with his German counterpart at the UN General Assembly where Moscow dismissed de-escalation calls. Photo via Theguardian

भारतीय कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की एक योजना को मंजूरी दी है। इसके अलावा, CBN की राजस्थान यूनिट ने पूरे राज्य में तेज किए गए प्रवर्तन अभियानों के दौरान लगभग चार टन अवैध सामान जब्त किया। इस बीच, नई दिल्ली में भारत-कोरिया CEPA अपग्रेड वार्ताओं का 12वां दौर आयोजित किया गया।

Associated Press द्वारा उद्धृत अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को यूक्रेन में रूसी हमलों में दो लोगों की मौत हो गई। यह घटना 2022 के बाद दोनों देशों के बीच पहले उच्च-स्तरीय राजनयिक संपर्क के दौरान मॉस्को द्वारा युद्ध को कम करने की जर्मनी की अपील को खारिज करने के कुछ घंटों बाद हुई (AP India)। यह हिंसा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस नए दबाव के साथ सामने आई, जिसमें उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ समझौते पर बातचीत करने का आह्वान किया था (AP India)।

यह खून-खराबा और राजनयिक गतिरोध न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के इतर सामने आया, जहां फरवरी 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनकी जर्मन समकक्ष एनालेना बेयरबॉक ने अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक की (Reuters India)। बेयरबॉक ने रूस से अपनी आक्रामकता समाप्त करने और सैनिकों को वापस बुलाने का आग्रह किया, लेकिन लावरोव ने इस आह्वान को खारिज कर दिया और मॉस्को के इस रुख को दोहराया कि संघर्ष की जड़ें पश्चिमी नीतियों और रूसी शर्तों पर बातचीत करने से यूक्रेन के इनकार में हैं (Reuters India)। यह मुलाकात, जो संक्षिप्त और कथित तौर पर तनावपूर्ण थी, ने मॉस्को और प्रमुख यूरोपीय राजधानियों के बीच लगातार बने हुए गतिरोध को रेखांकित किया, भले ही दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र में चैनल बनाए हुए हैं।

युद्ध के मैदान की बात करें तो, रूसी हमलों में दो लोगों की जान चली गई। Associated Press द्वारा उद्धृत अधिकारियों के अनुसार, यह हमलों और जवाबी हमलों की एक बड़ी लहर का हिस्सा था, जिसके कारण यूक्रेन और रूस के सीमावर्ती क्षेत्रों में कम से कम दस लोग मारे गए (AP India)। यूक्रेनी सेना ने रूस के भीतर ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित कई ठिकानों पर भी हमले किए, जो लगभग तीन साल पुराने युद्ध के फैलते दायरे को उजागर करता है। ये मौतें ऐसे समय में हुईं जब अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ज़ेलेंस्की से हत्याओं को रोकने के लिए "पुतिन के साथ समझौता करने" का आग्रह किया, एक ऐसा रुख जो कीव को व्यापक अमेरिकी सैन्य सहायता के प्रति उनके लंबे समय से चले आ रहे संदेह के अनुरूप है (AP India)। इस टिप्पणी पर यूक्रेनी अधिकारियों और कुछ यूरोपीय सहयोगियों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, जिनका तर्क है कि क्षेत्र सौंपने का दबाव आक्रामकता को बढ़ावा देगा और यूरोपीय सुरक्षा को कमजोर करेगा।

जबकि युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में जगह बनाई, नई दिल्ली ने एक अलग घरेलू और राजनयिक एजेंडा आगे बढ़ाया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू कोयला संसाधनों को सिंथेटिक ईंधन में परिवर्तित करके प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर आयात निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ सरफेस कोल और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की एक योजना को मंजूरी दी (PIB)। यह नीति रासायनिक फीडस्टॉक और ऊर्जा के लिए भारत के विशाल कोयला भंडार के उपयोग को लक्षित करती है, जिसे सरकार ऊर्जा सुरक्षा और "आत्मनिर्भर भारत" पहल के लिए महत्वपूर्ण मानती है।

इसी समय, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पश्चिमी राज्य में एक बड़े ड्रग्स रैकेट के खुलासे की सूचना दी। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) की राजस्थान यूनिट ने पूरे राज्य में चलाए गए तेज प्रवर्तन अभियानों के दौरान लगभग चार टन अवैध सामान जब्त किया (PIB)। यह अभियान इस क्षेत्र में सक्रिय अवैध ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई को दर्शाता है।

व्यापार मोर्चे पर, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप Agreement (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत का 12वां दौर नई दिल्ली में संपन्न हुआ (PIB)। इन वार्ताओं का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करना, नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करना और 2010 से लागू समझौते को आगे बढ़ाते हुए ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विसेज जैसे सेक्टरों में मार्केट एक्सेस का विस्तार करना है।

इन तमाम घटनाक्रमों का मेल — जंग के मैदान में तनाव बढ़ना, संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक गतिरोध, अमेरिका के बदलते राजनीतिक तेवर, और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता, आंतरिक सुरक्षा और व्यापार में विविधता लाने की भारत की कोशिशें — मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के बिखरे हुए स्वरूप को दर्शाता है। चूंकि लावरोव और बेयरबॉक न्यूयॉर्क में बिना किसी डि-एस्केलेशन के रास्ते के एक-दूसरे से अलग हुए, और कीव तथा यूरोपीय राजधानियों में तुरंत समझौते की ट्रम्प की अपील गूंजती रही, ऐसे में तत्काल आसार यही हैं कि हिंसा और कूटनीतिक गतिरोध और बढ़ेगा, क्योंकि लड़ाई रोकने या दोबारा बातचीत शुरू करने का कोई स्पष्ट तंत्र नजर नहीं आ रहा है।

उल्लिखित स्रोत

AP India·PIB·Reuters India