कैबिनेट ने चार नए रेलवे मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में चार मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को आज कैबिनेट की मंजूरी मिलना भारत के रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम है। आठ जिलों को कवर करने वाले और मौजूदा नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर जोड़ने वाले ये प्रोजेक्ट्स भीड़भाड़ को कम करके और फ्रेट व पैसेंजर क्षमता को बढ़ाकर ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे की प्राथमिकताओं में मल्टीट्रैकिंग (मौजूदा रूटों पर पटरियों की संख्या बढ़ाना) शामिल रहा है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। यह कदम रेल विकास पर लगातार दिए जा रहे फोकस के बाद उठाया गया है, जिसमें देश भर में बाधाओं को दूर करने और सर्विस की विश्वसनीयता में सुधार लाने के लिए पहले भी ऐसे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है।
Union Cabinet ने कल पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के आठ जिलों में फैले चार मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी, जिससे भारत के रेलवे नेटवर्क में लगभग 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से घोषित इस फैसले का उद्देश्य प्रमुख रूटों पर भीड़भाड़ को कम करना और संबंधित क्षेत्रों में फ्रेट व पैसेंजर क्षमता को बढ़ावा देना है (PIB)।
मल्टीट्रैकिंग—यानी मौजूदा कॉरिडोर पर ऑपरेशनल पटरियों की संख्या बढ़ाना—इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और बाधाओं को दूर करने के लिए Indian Railways की एक रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में उभरी है। स्वीकृत प्रोजेक्ट्स उन हाई-ट्रैफिक सेगमेंट को टारगेट करते हैं जहाँ वर्तमान में सिंगल या डबल ट्रैक ऑपरेशनल एफिशिएंसी को सीमित करते हैं। अतिरिक्त पटरियों की शुरुआत करके, रेलवे का लक्ष्य देरी को कम करना, सुरक्षा बढ़ाना और माल ढुलाई और कम्यूटर ट्रैफिक दोनों के कारण बढ़ रही मांग को पूरा करना है (PIB)।
यह कदम कनेक्टिविटी को मजबूत करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के नेशनल कैरियर के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण लिंक को अपग्रेड करने के लिए हाल के वर्षों में इसी तरह की मल्टीट्रैकिंग पहलों को मंजूरी दी गई है, जो मुख्य ट्रेड रूट के रूप में काम करते हैं। प्रोजेक्ट्स का यह मौजूदा सेट क्षेत्रीय विकास पर सरकार के फोकस को रेखांकित करता है, जिसमें चुने गए जिले पूर्वी और दक्षिणी भारत के विभिन्न भौगोलिक और आर्थिक केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं (PIB)।
हालाँकि घोषणा में प्रोजेक्ट्स के दायरे और उद्देश्यों की रूपरेखा दी गई है, लेकिन फंडिंग के आवंटन, पूरा होने की समयसीमा और शामिल सटीक जिलों जैसे विवरण अभी सामने नहीं आए हैं। Indian Railways ने ऐतिहासिक रूप से ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन पर जोर दिया है, और अक्सर प्रगति को बजट चक्र और भूमि अधिग्रहण की मंजूरी से जोड़ा है। स्टेकहोल्डर्स को आने वाले हफ्तों में और अधिक विवरण सामने आने की उम्मीद है क्योंकि Ministry of Railways राज्य सरकारों और निष्पादक एजेंसियों के साथ तालमेल बिठा रही है (PIB)।
यह पहल व्यापक “Make in India” और “Infrastructure for Growth” फ्रेमवर्क के तहत रेल आधुनिकीकरण पर निरंतर जोर को दर्शाती है। हालाँकि, केंद्र और राज्य प्राधिकरणों के बीच तालमेल, पर्यावरण मंजूरी और वित्तीय स्थिरता जैसी चुनौतियाँ संभवतः इन प्रोजेक्ट्स की दिशा तय करेंगी। फिलहाल, कैबिनेट की मंजूरी एक प्रक्रियात्मक मील का पत्थर है, जिससे ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक रूपरेखा बाद की घोषणाओं में तय की जानी बाकी है।


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