फीफा ने वर्ल्ड कप फाइनल के बाद हुई झड़प के मामले में अर्जेंटीना के तीन खिलाड़ियों को सस्पेंड किया

फीफा ने आज अर्जेंटीना के तीन खिलाड़ियों को सस्पेंड करने का जो फैसला लिया है, जिसमें मिडफील्डर लियांड्रो
शुक्रवार को फीफा ने पिछले महीने वर्ल्ड कप फाइनल में स्पेन के खिलाफ अर्जेंटीना की 1-0 से हार के बाद मैच के बाद हुई झड़प में शामिल रहे अर्जेंटीना के तीन खिलाड़ियों और एक कोच के खिलाफ कार्रवाई की। स्पेनिश खिलाड़ियों के साथ हाथापाई करने के मामले में मिडफील्डर लियांड्रो पारेदेस को 10 मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है (AP India)। जिनेवा में फीफा द्वारा घोषित इस अनुशासनिक कार्रवाई के तहत डिफेंडर नाहुएल मोलिना को 7 मैचों और फॉरवर्ड थियागो अल्माडा को 1 मैच के लिए बैन किया गया है। इसके अलावा, खिलाड़ियों और अर्जेंटीनी फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) पर कुल 210,000 डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया है।
ये सस्पेंशन जुलाई 2023 में ईस्ट रदरफोर्ड, न्यू जर्सी में हुए फाइनल मैच के दौरान और उसके बाद हुई घटनाओं से जुड़े हैं, जहां एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन के फेरान टोरेस द्वारा निर्णायक गोल दागे जाने के बाद तनाव बढ़ गया था। वीडियो में पारेदेस स्पेन के एरिक गार्सिया का गला पकड़ते और गावी को धक्का देकर जमीन पर गिराते हुए नजर आए थे। उन्हें वर्ल्ड कप के इतिहास के सबसे लंबे बैन में से एक का सामना करना पड़ रहा है। अर्जेंटीना के जून 2027 तक के तय 10 मैचों को देखते हुए यह एक तरह से इंटरनेशनल फुटबॉल से एक साल का बैन साबित होगा (AP India)। मोलिना और अल्माडा को झड़प में कम भूमिका के लिए दंडित किया गया, जबकि स्पेन के गावी को इसमें शामिल होने के लिए 1 मैच का सस्पेंशन मिला, जिसे उन्हें 26 सितंबर को इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले नेशंस लीग मैच के दौरान भुगतना होगा।
फीफा की डिसिप्लिनरी कमेटी ने अलग-अलग उल्लंघनों के लिए AFA पर भी कार्रवाई की, जिसमें इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल जीत के बाद फॉकलैंड द्वीप समूह का संदर्भ देने वाला राजनीतिक बैनर दिखाने और टूर्नामेंट के दौरान नस्लीय टिप्पणियों वाले फैंस के नारों जैसी घटनाओं के लिए 110,000 डॉलर का जुर्माना शामिल है (AP India)। फेडरेशन को नस्लवाद-विरोधी पहलों के वास्ते 100,000 डॉलर आवंटित करने का आदेश दिया गया। इसके अलावा, अर्जेंटीना को अपना अगला घरेलू मैच स्टेडियम की क्षमता को 50% तक सीमित रखते हुए खेलना होगा।
पारेदेस को मिली सजा की कड़ाई की तुलना इतिहास की बड़ी सजाओं से की जा रही है, जिसमें 2014 में एक प्रतिद्वंद्वी को काटने के लिए उरुग्वे के फॉरवर्ड लुई सुआरेज़ का चार महीने का बैन और 2013 में फासीवादी नारों का नेतृत्व करने के लिए क्रोएशिया के जोसिप सिम्यूनिक का 10 मैचों का सस्पेंशन शामिल है (AP India)। हालांकि, उन मामलों के विपरीत, पारेदेस का बैन केवल नेशनल टीम की ड्यूटी पर लागू होता है, जिससे वह क्लब फुटबॉल खेलना जारी रख सकते हैं।
अर्जेंटीना के फुटबॉल फेडरेशन ने इन फैसलों को चुनौती देने का इरादा जताया है और कहा है कि वह पहले फीफा की अपील कमेटी और फिर संभवतः कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर Sport के समक्ष अपील करने के लिए इन प्रतिबंधों के औपचारिक आधार की मांग करेगा (AP India)। AFA की कानूनी टीम ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस पेनल्टी को चुनौती देगी, हालांकि पारेदेस का 10 मैचों का सस्पेंशन इसका मुख्य निशाना हो सकता है।
मैदान के बाहर हुए विवादों के बावजूद वर्ल्ड कप की 34 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि हासिल करने वाली अर्जेंटीना की टीम के लिए ये सस्पेंशन एक विवादित टूर्नामेंट का अंत करते हैं (AP India)। हालांकि ये बैन मैच के बाद हुई हिंसा पर फीफा की कड़ी प्रतिक्रिया को दर्शाते हैं, लेकिन अपील की संभावना के चलते इसका अंतिम परिणाम अनिश्चित बना हुआ है, और मामले को सुलझाने की अभी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।
सूत्र: AP India


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