भारत और एडीबी ने चेन्नई की वाटर सप्लाई को मॉडर्नाइज करने के लिए 230 मिलियन डॉलर के लोन पर किए हस्ताक्षर

भारत और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने आज चेन्नई में वाटर सप्लाई और सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज करने के उद्देश्य से 230 मिलियन डॉलर के लोन समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो शहर की शहरी सेवाओं में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करता है। यह प्रोजेक्ट पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने, पानी की कमी को कम करने और क्लाइमेट से जुड़े जोखिमों के खिलाफ रेजिलीएंस (लचीलेपन) को बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित करता है, जो टिकाऊ शहरी विकास के लिए व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ मेल खाता है। यह सहयोग तेजी से बढ़ रहे महानगरों में क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की चल रही पहलों को दर्शाता है, जहां पुरानी प्रणालियों और बढ़ती मांग ने मौजूदा संसाधनों पर दबाव डाला है। यह लोन आवश्यक सेवाओं तक समान और भरोसेमंद पहुंच के लिए भारत के लक्ष्यों का समर्थन करने में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का लाभ उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कल, भारत और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने चेन्नई के वाटर सप्लाई और सैनिटेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज करने के लिए 230 मिलियन डॉलर के लोन समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो शहर की पुरानी शहरी सेवा चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चेन्नई क्लाइमेट-रेसिलीेंट वाटर सिक्योरिटी एंड सीवरेज प्रोजेक्ट नाम की इस परियोजना का उद्देश्य क्लाइमेट से जुड़े जोखिमों के खिलाफ रेजिलीएंस को मजबूत करते हुए सुरक्षित और भरोसेमंद पानी तक पहुंच को बढ़ाना है (Google News India)।
इस पहल में 170 किलोमीटर से अधिक वाटर सप्लाई और सीवर पाइपों का निर्माण, 7 वाटर पंपिंग स्टेशनों और 38 सीवर पंपिंग स्टेशनों का अपग्रेडेशन, और परफॉर्मेंस-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए यूटिलिटी एसेट्स को मजबूत करना शामिल होगा (Google News India)। एक मुख्य इनोवेशन यह है कि चेन्नई एक व्यापक "रिंग-मेन" समाधान लागू करने वाला पहला भारतीय शहर बन गया है - यह एक क्लोज्ड-लूप सिस्टम है जिसे वाटर प्रेशर को संतुलित करने और सर्विस एरिया में कुशल वितरण सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे शहरी वाटर नेटवर्क में समानता और आपदा प्रतिरोध में सुधार होता है।
यह सहयोग चेन्नई में ADB की पिछली परियोजनाओं पर आधारित है और भारत के प्रमुख शहरी विकास कार्यक्रमों, जैसे कि अमृत (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation 2.0) और अर्बन चैलेंज फंड के साथ मेल खाता है (Google News India)। ADB, जिसने 1966 में अपनी स्थापना के बाद से एशिया में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का समर्थन किया है, तेजी से बढ़ते महानगरों में बुनियादी सेवाओं और क्लाइमेट रेजिलीएंस पर जोर देता है। इसकी भागीदारी टिकाऊ शहरी विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का लाभ उठाने की भारत की व्यापक रणनीति को दर्शाती है, खासकर उन शहरों में जहां पुरानी प्रणालियां और बढ़ती मांग संसाधनों पर दबाव डालती हैं।
एक प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र, चेन्नई, दशकों से पानी की कमी और अपर्याप्त स्वच्छता से जूझ रहा है, जो जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण और बढ़ गया है। यह प्रोजेक्ट शहर की वाटर यूटिलिटी के लिए बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन (wastewater management) और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी सहित सिस्टमिक अपग्रेड्स को लक्षित करके इन मुद्दों का समाधान करता है। ऐसे उपाय पब्लिक हेल्थ और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पानी तक अविश्वसनीय पहुंच असमान रूप से कम आय वाले समुदायों को प्रभावित करती है और शहरी उत्पादकता में बाधा डालती है।
हालांकि यह लोन प्रगति का प्रतीक है, लेकिन प्रोजेक्ट पूरा होने की समय सीमा और इसके प्रभाव की निगरानी के लिए तंत्र अभी भी अनिर्दिष्ट हैं। जैसे-जैसे चेन्नई शहरीकरण और पर्यावरणीय तनाव के दबाव से जूझ रहा है, इस पहल की सफलता प्रभावी कार्यान्वयन और रखरखाव तथा सामुदायिक जुड़ाव में निरंतर निवेश पर निर्भर करेगी।


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