भारत और नामीबिया ने नई दिल्ली में चौथे संयुक्त व्यापार समिति सत्र का आयोजन किया

भारत-नामीबिया संयुक्त व्यापार समिति का चौथा सत्र कल नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के अधिकारी द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विस्तार पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के एक बयान के अनुसार, भारतीय राजधानी की आधिकारिक सरकारी सुविधाओं में आयोजित इस बैठक में कृषि, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और रिन्यूएबल एनर्जी सहित आपसी सहयोग बढ़ाने वाले क्षेत्रों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और नामीबिया के व्यापार, औद्योगीकरण तथा SME विकास मंत्रालय ने संयुक्त रूप से इस सत्र की अध्यक्षता की, जिसमें पिछली बैठकों के दौरान अंतिम रूप दिए गए समझौतों पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई। प्रतिनिधियों ने सप्लाई चेन लिंकेज को मजबूत करने और वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। PIB ने बताया कि समिति ने सतत विकास लक्ष्यों के अनुकूल क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों (ज्वाइंट वेंचर्स) की संभावनाओं का भी पता लगाया, हालांकि विशिष्ट परियोजनाओं या समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया।
व्यापार और निवेश पर बातचीत को संस्थागत रूप देने के लिए स्थापित भारत-नामीबिया संयुक्त व्यापार समिति 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से तीन बार मिल चुकी है। 2022 में विंडहोक में आयोजित पिछले सत्र के परिणामस्वरूप फार्मास्यूटिकल और टेक्सटाइल उद्योगों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। कल की चर्चाओं में दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने पर बढ़ते जोर को रेखांकित किया गया, विशेष रूप से अफ्रीकी बाजारों में भारत की बढ़ती भूमिका और दक्षिणी अफ्रीका में नामीबिया की रणनीतिक स्थिति के आलोक में।
यह बैठक 60 दिनों के भीतर लंबित तकनीकी चर्चाओं को अंतिम रूप देने और अपनी-अपनी सरकारों को सीमा पार सहयोग के लिए एक रोडमैप सौंपने की प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। हालांकि, PIB के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सत्र के दौरान कोई नए व्यापार लक्ष्य या निवेश प्रतिबद्धताएं घोषित की गईं या नहीं। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने वार्ताओं को "सकारात्मक" बताया, लेकिन आयात कोटे या बौद्धिक संपदा (इंटेलिज्क्चुअल प्रॉपर्टी) ढांचे को लेकर विवाद जैसे विवादास्पद मुद्दों पर कोई और विवरण नहीं दिया।
फिलहाल, समिति के अगले सत्र के लिए कोई सार्वजनिक समयसीमा नहीं है, और न ही इस बात पर कोई स्पष्टता है कि कल की बैठक के परिणाम किस प्रकार मापने योग्य आर्थिक लाभ में तब्दील होंगे। आधिकारिक विज्ञप्ति में ठोस परिणामों की अनुपस्थिति भारत-नामीबिया व्यापार संबंधों की गति और दायरे को लेकर सवालों को अनुत्तरित छोड़ देती है।


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