हिमालय में आए बर्फीले तूफान के बाद क्लाइंबर निर्मल पुर्जा का शव बरामद हुआ

बढ़ता तापमान ग्लेशियरों को अस्थिर कर रहा है और स्नोपैक की स्थिति को बदल रहा है, जिससे एवलॉन्च और बर्फ खिसकने की घटनाएं अधिक बार और कम अनुमानित हो रही हैं। इसके चलते पर्वतारोहियों के लिए हिमालय लगातार खतरनाक होता जा रहा है। गर्म मौसम पारंपरिक क्लाइंबिंग विंडो को भी छोटा कर रहा है, जिससे एक्सपेडिशन बहुत कम समय में चढ़ाई करने को मजबूर होते हैं, और एवरेस्ट जैसे लोकप्रिय रूट्स पर भीड़भाड़ के कारण जोखिम और बढ़ जाता है। भारतीय अधिकारियों और रिसर्च संस्थानों ने पूरी पर्वत श्रृंखला में बर्फ के जल्दी पिघलने और अधिक चरम मौसमी घटनाओं के एक पैटर्न को दर्ज किया है, और इन बदलावों को हाल के सीजन में क्लाइंबरों के लिए बढ़ते खतरे से सीधे तौर पर जोड़ा है।
दिग्गज नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का शव रविवार को ब्रॉड पीक पर करीब 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला। पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्तिस्तान क्षेत्र में 8,047 मीटर ऊंचे इस पहाड़ पर एक 10-सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय एक्सपेडिशन को एवलॉन्च द्वारा बहा ले जाने के तीन दिन बाद यह शव मिला है (The Hindu)। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान ने बरामद किए गए क्लाइंबरों की पहचान पुर्जा, चीनी नागरिक वांग झोंग और नेपाली शेर्पा निमा शेर्पा तथा किली पेंबा शेर्पा के रूप में की है (AP India)। एक ग्राउंड रेस्क्यू टीम रविवार को घटनास्थल पर पहुंची और पुर्जा के साथ तीन अन्य शवों को देखा, हालांकि उनकी पहचान अभी तक कन्फर्म नहीं हो पाई है (The Hindu) |
इस बरामदगी के साथ ही अब तक मिले शवों की कुल संख्या पांच हो गई है, जबकि बाकी बचे पांच लापता क्लाइंबरों की तलाश जारी है (The Hindu)। शुक्रवार को रेस्क्यूर्स ने चार शवों का पता लगाया था, लेकिन खराब मौसम की वजह से सर्च-एंड-रेस्क्यू हेलीकॉप्टरों के उड़ान भरने से पहले वे केवल तीन शवों — ओमान की नागरिक नथिरा अहमद, अमेरिकी मैलोरी गीस और नेपाली बहादुर गुरुंग — को ही बरामद कर पाए थे (AP India)। सेना समर्थित टीमों ने रविवार को फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया, जबकि ग्राउंड क्रू बेहद कठिन इलाकों में नवीनतम शवों को जापानी कैंप तक पहुंचाने में जुटे रहे, क्योंकि तेज ढलान और एवलॉन्च के जोखिम के कारण हेलीकॉप्टरों की तैनाती संभव नहीं हो पाई (The Hindu)।
यह एवलॉन्च गुरुवार, 30 जुलाई को आया था, जब 'निम्स दाई' के नाम से मशहूर पुर्जा के नेतृत्व में टीम K2 के पास काराकोरम रेंज में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी को फतह करने की कोशिश कर रही थी (The Hindu)। इस एक्सपेडिशन में पांच नेपाली क्लाइंबर, एक पाकिस्तानी, एक ओमानई, एक अमेरिकी और एक चीनी नागरिक शामिल थे (The Hindu)। लापता लोगों में पाकिस्तानी गाइड सोहेल साखी भी शामिल हैं, जो एक भूगोलवेत्ता और हाई-एल्टीट्यूड फोटोग्राफर थे। उनकी कंपनी मूविंग माउंटेंस के अनुसार, यह उनका आखिरी एक्सपेडिशन माना जा रहा था (AP India)। शनिवार को, पुर्जा की कंपनी एलीट एक्सपेड (Elite Exped) ने घोषणा की थी कि समूह के सभी सदस्य इस हादसे में मारे गए हैं (The Hindu)।
43 वर्षीय पुर्जा ब्रिटिश सेना के एक पूर्व सैनिक थे, जिन्होंने 2019 में रिकॉर्ड 189 दिनों में 8,000 मीटर से अधिक ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई करके वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त की थी (AP India)। इस उपलब्धि को नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री 14 पिक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल में दिखाया गया है (The Hindu)। जब यह एवलॉन्च आया, तब वह सभी 14 आठ-हजारियों (Eight-thousanders) के दूसरे दौर को पूरा करने के बेहद करीब थे (The Hindu)। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद ने इस त्रासदी को “वैश्विक पर्वतारोहण बिरादरी के लिए एक अपूरणीय क्षति” बताया और इस सर्च ऑपरेशन में शामिल सेना, नागरिक रेस्क्यूर्स और शेर्पाओं की सराहना की (AP India)।
इस आपदा ने ऊंचे हिमालय और काराकोरम में बदलते रिस्क पैटर्न पर एक बार फिर सबका ध्यान खींचा है। एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस के हिमस्खलन (avalanches) जुलाई के महीने में आम तौर पर नहीं होते, जिसे ऐतिहासिक रूप से फरवरी से अप्रैल के मुख्य हिमस्खलन सीजन के बाहर माना जाता है, जो पीक सर्दियों की बर्फबारी के बाद आता है (Indian Express)। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भूगोल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हसन राजा नकवी ने The Indian Express को बताया कि क्लाइमेट चेंज साफ तौर पर पश्चिमी हिमालय के स्वरूप को बदल रहा है। उन्होंने जिनेवा यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन का हवाला दिया जिसमें पिछले कुछ दशकों में हिमस्खलन की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है (Indian Express)। इन पर्यावरणीय खतरों के साथ-साथ, पर्वतारोहियों को पॉपुलर रूट्स पर लगातार भारी भीड़ का भी सामना करना पड़ता है, जिससे क्लाइंबर्स ऐसी जगहों पर फंस जाते हैं जहां अत्यधिक ऊंचाई पर होने वाली देरी जानलेवा साबित हो सकती है (Indian Express)। जैसे-जैसे ब्रॉड पीक की दुर्गम ढलानों पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लापता पांच लोगों का भाग्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

AP India·The Hindu