पंजाब में AAP के कार्यक्रम को लेकर स्टूडेंट्स में गुस्सा
पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक कार्यक्रम ने स्टूडेंट्स के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। आलोचना करते हुए स्टूडेंट्स ने भगत सिंह की विरासत का हवाला दिया और कहा कि इस पूरी घटना को देखकर वह क्रांतिकारी शख्सियत "रो रहे होंगे"। द इंडियन एक्सप्रेस ने इस तीखी प्रतिक्रिया पर रिपोर्ट दी है, हालांकि उपलब्ध दावों में कार्यक्रम के स्वरूप और स्टूडेंट्स के गुस्से के सटीक कारणों के बारे में विशिष्ट विवरण नहीं दिए गए हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस ने शुक्रवार को एक आर्टिकल प्रकाशित किया, जिसमें हाल ही में हुए आम आदमी पार्टी के एक कार्यक्रम पर पंजाब के स्टूडेंट्स की तीखी प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया गया है। इस विवाद को क्रांतिकारी प्रतीक भगत सिंह के नाम और विचारों के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कैसे इस आयोजन पर स्टूडेंट ग्रुप्स ने कड़ी आलोचना की। उनका तर्क था कि इस कार्यक्रम ने स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े आदर्शों के साथ धोखा किया है, जिसके चलते यह बात सामने आई कि इस तमाशे को देखकर वह "रो रहे होंगे"।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह तनाव पार्टी की राजनीतिक नौटंकी और राज्य के स्टूडेंट संगठनों द्वारा दावा की जाने वाली क्रांतिकारी एवं व्यवस्था-विरोधी विरासत के बीच महसूस हो रही दूरी के कारण पैदा हुआ है। आर्टिकल में बताया गया है कि सत्ताधारी पार्टी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ऐसे प्रतीकों और बयानों का इस्तेमाल किया गया, जिसे लेकर स्टूडेंट्स का मानना था कि पार्टी ने पंजाब के युवाओं के सामने मौजूद गंभीर मुद्दों (जैसे बेरोजगारी, कृषि संकट और ड्रग्स की समस्या) को नजरअंदाज करते हुए राजनीतिक फायदे के लिए भगत सिंह की छवि का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में जिन स्टूडेंट लीडर्स के बयान दर्ज हैं, उन्होंने AAP सरकार पर आरोप लगाया कि उसने प्रतिरोध के एक ऐतिहासिक प्रतीक को केवल चुनाव प्रचार का एक साधन बना दिया है। उनका तर्क था कि इस क्रांतिकारी का विजन मौजूदा शासन के रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल नहीं खाता है।
द इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि यह गुस्सा केवल प्रतीकात्मक नहीं है। यह पंजाब की स्टूडेंट पॉलिटिक्स में चल रहे एक बड़े बदलाव को दर्शाता है, जहां वामपंथी और क्रांतिकारी परंपराओं से जुड़े संगठन मौजूदा प्रशासन से जवाब मांगने में तेजी से मुखर हो रहे हैं। रिपोर्ट इस घटना को फीस बढ़ोतरी, कैंपस की स्वायत्तता और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के लागू होने जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार और स्टूडेंट बॉडीज के बीच हुए टकरावों के सिलसिले का हिस्सा बताती है। इस संदर्भ में, AAP का यह कार्यक्रम एक ऐसा चिंगारी साबित हुआ, जिसने इतिहास के अधिकार को लेकर चल रही पुरानी शिकायतों को एक सार्वजनिक विवाद में बदल दिया।
आर्टिकल के अंत में इस अनसुलझे तनाव को उजागर किया गया है: जहां पार्टी चुनावी वैधता हासिल करने के लिए क्रांतिकारी की विरासत को अपनाना चाहती है, वहीं स्टूडेंट मूवमेंट भगत सिंह के विचारों को इस रूप में देखता है जो दिखावे के बजाय सत्ता से जवाबदेही की मांग करता है। सरकार स्टूडेंट्स की इन गंभीर मांगों पर ध्यान देती है या फिर इस गुस्से को कानून-व्यवस्था की चुनौती मानती है, यह सवाल अभी भी बना हुआ है।
Indian Express