TMC का BJP पर आरोप, पश्चिम बंगाल चुनाव में वोटर्स का ध्रुवीकरण करने के लिए यूट्यूबरों को दिए पैसे

तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के जरिए समाज को बांटने वाला नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है। TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी फायदे के लिए राज्य में धार्मिक विभाजन पैदा करने के वास्ते यूट्यूबरों का इस्तेमाल कर रही है। ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब चुनाव वाले इस राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि विपक्ष मतदाताओं का सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यूट्यूबरों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को पैसे देकर धार्मिक ध्रुवीकरण का नैरेटिव तैयार करने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए बेलेघाटा के विधायक ने चुनाव आयोग के पास जमा कराए गए खर्च के ब ्योरों का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया है कि बीजेपी ने चुनाव पर 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए। इस आंकड़े के सामने आने के बाद कई कंटेंट क्रिएटर्स के नाम सार्वजनिक डोमेन में आ गए हैं।
घोष ने एक खास इंफ्लुएंसर्स का जिक्र किया जो फरवरी में पार्क स्ट्रीट के ओली पब (Oly Pub) गया था और आरोप लगाया था कि उसे मटन की जगह बीफ परोसा गया, और विरोध के दौरान उसने खुद को एक ब्राह्मण बताया था। इस घटना के बाद एक वेटर की गिरफ्तारी हुई थी और इस पुराने रेस्तरां की छवि को नुकसान पहुंचा था। घोष के मुताबिक, उसी शख्स को बीजेपी से 2.5 लाख रुपये मिले थे, जिसका भुगतान पार्टी के आधिकारिक खर्च रिटर्न में दर्ज है। घोष ने कहा, "अब हम देख सकते हैं कि उसे बीजेपी द्वारा 2.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।"
TMC नेता ने मुख्यधारा के मीडिया संगठनों के विज्ञापनों और प्राइवेट यूट्यूब चैनल चलाने वाले व्यक्तियों को किए गए भुगतानों के बीच फर्क बताया। उन्होंने कहा, "एक मीडिया हाउस और उस यूट्यूब चैनल में फर्क होता है जिसे कोई अपने निजी मकसद के लिए चला रहा है। अपने प्लेटफॉर्म के जरिए वे लगातार TMC की छवि को नीचा दिखाते रहे हैं। लेकिन अब ECI की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि उन्होंने यह सब पैसों के लिए किया था। उन्हें हमारे खिलाफ एक मनगढ़ंत नैरेटिव तैयार करने के लिए पैसे दिए गए थे।"
घोष ने इन इंफ्लुएंसर्स के आचरण की जांच की मांग की और तर्क दिया कि वे पेड असाइनमेंट को अंजाम देते वक्त पत्रकारों होने का नाटक करते थे, जो एक ऐसा चलन है जिससे जनता की नजरों में विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। चुनाव आयोग की फाइलिंग से पता चलता है कि बीजेपी ने इस तीखे मुकाबले वाले चुनाव में आम प्रचार पर 217.16 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों पर 69.83 करोड़ रुपये खर्च किए थे। बीजेपी ने 293 घोषित सीटों में से 207 सीटें जीतकर चुनाव जीता था, जिससे तृणमूल कांग्रेस सिमटकर 80 सीटों पर आ गई थी। सत्ताधारी पार्टी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान इंफ्लुएंसर्स को शामिल किया था, और डिजिटल पहुंच बढ़ाने के लिए अपनी खुद की 'अमी बांग्ला डिजिटल योद्धा' (Ami Banglar Digital Joddha) पहल शुरू की थी।
The Hindu