छात्र की आत्महत्या के बाद देर रात हुए प्रदर्शन से आईआईटी-दिल्ली कैंपस में तनाव

एक छात्र की आत्महत्या के बाद आईआईटी-दिल्ली में देर रात अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जो देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और अकादमिक दबाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को उजागर करता है। इस घटना ने कैंपस में तनाव को और बढ़ा दिया है। छात्र ऐसी त्रासदियों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही और मुद्दों के समाधान के लिए सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं। हालांकि मामले की डिटेल अभी जांच के दायरे में हैं, लेकिन इस घटना से हाई-स्टेक अकादमिक माहौल में छात्रों की भलाई को लेकर चल रही व्यापक बहस एक बार फिर सामने आ गई है। रात के वक्त हुए इस प्रदर्शन से यह बात रेखांकित होती है कि संस्थागत जिम्मेदारी और छात्र कल्याण को लेकर बातचीत शुरू होना कितना जरूरी है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को दिन में एक छात्र की आत्महत्या के बाद देर रात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली कैंपस में छात्र विरोध प्रदर्शन के लिए जमा हो गए। आधी रात के आसपास शुरू हुए इस प्रदर्शन में कैंपस के केंद्रीय इलाकों में दर्जनों छात्र इकट्ठा हुए और उन्होंने बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता तथा संस्थान के एडमिनिस्ट्रेशन से जवाबदेही की मांग करते हुए नारे लगाए (Indian Express)।
मंगलवार सुबह मृत मिले छात्र की पहचान उजागर नहीं की गई है। हालांकि मौत के स्पष्ट कारणों की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में छात्रों द्वारा झेले जा रहे अकादमिक और सामाजिक दबाव को लेकर चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि छात्र संघ द्वारा बार-बार अपील किए जाने के बावजूद संस्थान काउंसलिंग सेवाओं और अकादमिक तनाव प्रबंधन में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर करने में नाकाम रहा है (Indian Express)।
बुधवार सुबह तक कैंपस में तनाव बना रहा और एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग्स के पास सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए थे। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करने वाले छात्रों ने “सामूहिक दुख और गुस्से” का माहौल बताया और इस बात पर जोर दिया कि आत्महत्या कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उपेक्षा के एक पैटर्न का हिस्सा है। एक प्रदर्शनकारी ने, अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हमने खामोशी की वजह से अपने कई साथियों को खो दिया है” (Indian Express)।
यह घटना भारत के शीर्ष शिक्षण संस्थानों की एक गंभीर चुनौती को उजागर करती है, जहां पढ़ाई की ऊंची उम्मीदें और कॉम्पिटिटिव माहौल अक्सर अपर्याप्त मेंटल हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर से टकरा जाते हैं। पिछले पांच वर्षों में, कई आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित कॉलेजों में तनाव, आर्थिक बोझ या भेदभाव से जुड़े छात्रों के आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। साल 2023 में, एक संसदीय समिति ने काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत करने और मदद मांगने से जुड़ी झिझक को कम करने के लिए सुधारों का आग्रह किया था, लेकिन अलग-अलग कैंपसों में इन्हें लागू करने का काम एक समान रूप से नहीं हुआ है (Indian Express)।
बुधवार दोपहर तक आईआईटी दिल्ली के एडमिनिस्ट्रेशन ने इस प्रदर्शन या आत्महत्या पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की थी। छात्रों ने इस घटना और संस्थान की मेंटल हेल्थ नीतियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि यह प्रदर्शन और तेज होगा या आने वाले दिनों में छात्रों और अधिकारियों के बीच बातचीत शुरू होगी (Indian Express)।


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