CJP ने एक एक्टिविस्ट के पिता से जुड़े स्कूल विवाद को लेकर बंगाल सरकार पर दबाव बढ़ाया

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CJP) ने एक एक्टिविस्ट के पिता की मौत से जुड़े बढ़ते विवाद को लेकर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार पर अपनी तीखी आलोचना बढ़ा दी है। इस घटना ने पिछले कुछ दिनों में व्यापक ध्यान आकर्षित किया है और यह सत्ता पक्ष के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव का एक मुख्य केंद्र बन गई है।
CJP के नेताओं ने आज मध्य कोलकाता में एक सरकारी स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और पश्चिम बंगाल की बीजेपी नीत सरकार पर एक एक्टिविस्ट के पिता की मौत के मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनकी मौत के बाद से यह मामला शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। जवाबदेही की मांग करने वाले बैनर थामे प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्कूल द्वारा समय पर मेडिकल सहायता न दिए जाने के कारण 62 वर्षीय आलोक साहा की मौत हो गई। आलोक साहा एक्टिविस्ट सोमा साहा के पिता थे, जो पिछले हफ्ते कैंपस में बेहोश होकर गिर पड़े थे। (Indian Express)
यह घटना 18 अगस्त को हुई थी, जब आलोक साहा अपनी बेटी के दाखिले के रिकॉर्ड से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए शहर के बालीगंज इलाके में स्थित स्कूल गए थे। चश्मदीदों का दावा है कि स्कूल अधिकारियों के साथ तीखी बहस के बाद उन्हें दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ा, हालांकि सटीक परिस्थितियों की जांच अभी भी जारी है। राज्य सरकार की मुखर आलोचक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CJP) से जुड़ी सोमा साहा ने तब से स्कूल प्रशासन पर "जानबूझकर कार्रवाई न करने" का आरोप लगाया है, और दावा किया है कि स्टाफ ने इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करने में देरी की। स्कूल ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा है कि स्टाफ ने प्रोटोकॉल का पालन किया और साहा को तुरंत अटेंड किया गया था। (Indian Express)
यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है, जिसमें CJP नेताओं ने बीजेपी सरकार पर सत्ताधारी पार्टी से जुड़े स्कूल अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है। राज्य CJP अध्यक्ष सुभाष भौमिक ने आरोप लगाया कि स्कूल के प्रिंसिपल और कई स्टाफ मेंबर "सक्रिय बीजेपी पदाधिकारी" हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनकी प्रतिक्रिया में राजनीतिक पक्षपात शामिल था। बीजेपी ने इन दावों को खारिज करते हुए आरोपों को "बेबुनियाद" बताया है और CJP पर राजनीतिक फायदे के लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। राज्य के शिक्षा मंत्री स्वपन कुमार भट्टाचार्य ने कहा, "सरकार शैक्षणिक संस्थानों के राजनीतिकरण को बर्दाश्त नहीं करेगी," और साथ ही यह भी जोड़ा कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। (Indian Express)
यह विवाद पश्चिम बंगाल में बीजेपी और CJP के बीच बढ़े हुए तनाव के बीच सामने आया है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव के बीच बीजेपी अपने पैर पसारने की कोशिश कर रही है। राज्य में तृणमूल नीत गठबंधन की एक अहम सहयोगी CJP ने शिक्षा नीति से लेकर कथित सांप्रदायिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दों पर लगातार बीजेपी को निशाना बनाया है। इस स्कूल विवाद ने इस प्रतिद्वंद्विता में एक और नया अध्याय जोड़ दिया है, और दोनों पक्ष आगामी स्थानीय चुनावों से पहले समर्थन जुटाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। (Indian Express)
जबकि आलोक साहा की मौत की पुलिस जांच जारी है, स्कूल के इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल और क्या राजनीतिक संलिप्तता ने इसके प्रशासन केactions को प्रभावित किया, इस पर सवाल बने हुए हैं। राज्य के शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में हेल्थ और सेफ्टी उपायों की समीक्षा की घोषणा की है, हालांकि एक्टिविस्ट और विपक्षी दल अधिक पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, और साहा की मौत का सटीक कारण जानने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। (Indian Express)
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