महिला हॉकी वर्ल्ड कप के अपने ओपनर मुकाबले में भारत ने चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला
कल, भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2026 वर्ल्ड कप के अपने पूल डी के ओपनर मुकाबले में ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन के खिलाफ 2-2 से मुकाबला ड्रॉ कराया।

भारत और चीन के बीच विमेंस हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का यह मैच भारत में महिलाओं के खेलों पर बढ़ते ध्यान के बीच आया है। दो दिन पहले अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया था। ओलंपिक रजत पदक विजेता होने के नाते चीन भारत के लिए एक कड़ी चुनौती पेश करता है, और भारतीय टीम के प्रदर्शन पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि खेलों और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की उपलब्धियां राष्ट्रीय प्रगति का प्रतीक बनती जा रही हैं। यह मुकाबला खेल कूटनीति और जेंडर प्रतिनिधित्व के मेल को रेखांकित करता है, जो हाल ही में आए सरकारी बयानों और मीडिया कवरेज में दिखाई देने वाले व्यापक सामाजिक बदलावों को दर्शाता है।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने रविवार को एम्सटेलवीन के वैजेनर हॉकी स्टेडियम में FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के अपने ओपनर मुकाबले में ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच 2-2 से ड्रॉ कराया। भारत के लिए फॉरवर्ड नवनीत और दीपिका ने गोल किए, लेकिन चीन ने दो बार वापसी करते हुए बराबरी हासिल की, जिससे दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर का पता चलता है। पूल डी के इस मुकाबले में भारत ने जुझारू तेज़ी और आक्रामक रुख दिखाया। टीम ने दबाव के बीच अपनी डिफेंसिव अनुशासन को बनाए रखा और टूर्नामेंट की शीर्ष दावेदारों में से एक के खिलाफ एक अहम अंक हासिल किया (Google News India)।
मैच की शुरुआत में भारत ने अपना दबदबा बनाया। नवनीत और दीपिका ने स्कोरिंग के मौकों का फायदा उठाया और अपनी टीम को दो बार आगे किया। हालांकि, ओलंपिक रजत पदक विजेता के रूप में चीन ने अपनी काबिलियत दिखाते हुए दोनों मौकों पर स्कोर बराबर कर दिया। मैच के आखिरी चरणों में बार-बार परीक्षण से गुजरी भारत की डिफेंस ने डटकर मुकाबला किया और मैच को ड्रॉ कराने में सफल रही। चीफ कोच शूर्ड मारिज्ने ने अपनी टीम के “लचीलेपन, दृढ़ संकल्प और आक्रामक रुख” की तारीफ की, लेकिन सुधार के क्षेत्रों पर भी जोर दिया, खासकर गेंद वापस मिलने के बाद पजेशन बनाए रखने पर (Google News India)।
यह परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के बाद आया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया था। वैश्विक मंच पर टीम के प्रदर्शन को व्यापक सामाजिक प्रगति के प्रतीक के रूप में बारीकी से देखा जा रहा है, जो हाल ही में आए सरकारी बयानों में उजागर हुई खेल कूटनीति और जेंडर प्रतिनिधित्व के मेल को दर्शाता है (PIB)।
अब भारत का पूरा ध्यान 18 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने दूसरे पूल डी मैच पर है, जो ग्रुप चरण से आगे बढ़ने की उनकी उम्मीदों के लिए अहम साबित हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत, जिसने इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से हार के साथ अपने अभियान की शुरुआत की थी, पूल में शीर्ष दो टीमों में रहने और सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने की भारत की उम्मीदों को मजबूत करेगी। मारिज्ने ने अपने खिलाड़ियों से किसी भी तरह के भटकाव से बचने की अपील करते हुए कहा, “हम गणित या इस बात पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं कि कौन किसके खिलाफ जीत रहा है। हमारे लिए, सबसे महत्वपूर्ण खुद पर ध्यान केंद्रित करना और अपनी ताकतों पर फोकस करना है” (Google News India)।
दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका अपनी शुरुआती हार से उबरने के लिए पूरी तरह से प्रेरित होगा, जिससे भारत की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि चीन के खिलाफ भारत का ड्रॉ उसके संयम और संघर्ष करने की क्षमता को दर्शाता है, लेकिन इस पॉजिटिव मोमेंटम को जीत में बदलने के लिए और अधिक सटीक फिनिशिंग और मिडफील्ड में लगातार नियंत्रण की जरूरत होगी। 18 अगस्त को होने वाला साउथ अफ्रीका का मुकाबला इस बात की परीक्षा लेगा कि भारत अपने पहले प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए टूर्नामेंट के दबावों से कैसे पार पाता है।
चूंकि पूल डी एक कड़े मुकाबले का मैदान बनता जा रहा है (इंग्लैंड अपनी शानदार शुरुआत के बाद फिलहाल ग्रुप में सबसे आगे है), ऐसे में भारत की आगे की राह अपनी intensidad (गहनता) बनाए रखने और रणनीतिक कमियों को दूर करने पर टिकी है। फिलहाल, चीन के खिलाफ मुकाबला उनके पोटेंशियल की गवाही देता है, हालांकि आगे बढ़ने के लिए आने वाले मैचों में सटीकता और निरंतरता बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
स्रोतः Google News India, Indian Express, PIB


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