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RBI के FX फुटप्रिंट ने सख्ती से मैनेज किए जाने वाले रुपये की यादें ताजा कीं

The Reserve Bank of India has cut short its FX swap facility for banks after witnessing a robust $50 billion in deposits from non-resident Indians, influencing liquidity and exchange rate strategies amid rising oil prices and recent economic challenges.
The Reserve Bank of India has cut short its FX swap facility for banks after witnessing a robust $50 billion in deposits from non-resident Indians, influencing liquidity and exchange rate strategies amid rising oil prices and recent economic challenges. Photo via Cfo

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फॉरेन एक्सचेंज बाजारों में हालिया दखल, जो उसके भारी दखल से जुड़ा है, ने रुपये के मूल्य को मैनेज करने में इसकी ऐतिहासिक भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित किया है। ट्रेडर्स का कहना है कि बढ़ते दबाव के बीच सेंट्रल बैंक करेंसी को सपोर्ट करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है, जो अतीत के उन दौरों की याद दिलाता है जब काफी सख्ती बरती जाती थी। इससे बाजार की ताकतों और रेगुलेटरी कंट्रोल के बीच संतुलन पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। यह कदम रुपये को स्थिर करने के चल रहे प्रयासों को रेखांकित करता है।

ट्रेडर्स ने सोमवार को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज बाजारों में अपना दखल बढ़ा दिया है। उसका "भारी फुटप्रिंट" बढ़ते दबाव के बीच रुपये को स्थिर करने के नए प्रयासों का संकेत देता है। सेंट्रल बैंक की इन गतिविधियों में डॉलर की संदिग्ध बिक्री और करेंसी स्वैप शामिल हैं। इनकी तुलना अतीत के उस दौर से की जा रही है जब कड़ी निगरानी रखी जाती थी और RBI अर्थव्यवस्था को बाहरी उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए रुपये की चाल को खुद मैनेज करता था (Reuters, Google News India)।

मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, भारतीय रुपया, जिस पर इस साल लगातार गिरावट का दबाव बना हुआ है, अब निकट भविष्य में एक सीमित दायरे में बने रहने की उम्मीद है। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब बॉंड ट्रेडर्स RBI की हालिया पॉलिसी मिनट्स के जारी होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी और करेंसी मैनेजमेंट की व्यापक रणनीति पर स्थिति साफ हो सकती है। ट्रेडर्स ने नोट किया कि RBI का हालिया दखल पिछले कुछ महीनों की तुलना में अधिक खुलकर सामने आया है, और बाजार में दिख रही गतिविधियों से अत्यधिक गिरावट को रोकने के जानबूझकर किए जा रहे प्रयासों का संकेत मिलता है (Reuters, Google News India)।

ऐतिहासिक रूप से, RBI ने रुपये के मूल्य को प्रभावित करने के लिए डायरेक्ट मार्केट ऑपरेशन से लेकर कैपिटल फ्लो पर रेगुलेटरी उपायों तक कई तरह के साधनों का इस्तेमाल किया है। दखलंदाजी की इस मौजूदा लहर ने 2013 के करेंसी संकट की यादें ताजा कर दी हैं, जब ग्लोबल अनिश्चितता के दौर में सेंट्रल बैंक ने आक्रामक तरीके से रुपये का बचाव किया था। हालांकि ऐसे उपाय अल्पकालिक स्थिरता तो दे सकते हैं, लेकिन वे तेजी से खुलती अर्थव्यवस्था में सख्ती से मैनेज किए जाने वाले एक्सचेंज रेट की लंबी अवधि की स्थिरता पर भी सवाल उठाते हैं। एनालिस्ट्स चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक दखल देने से फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व कम हो सकता है, हालांकि RBI ने अभी तक कैपिटल कंट्रोल जैसे सख्त कदमों से परहेज किया है (Reuters)।

RBI के इन कदमों का समय व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं के साथ मेल खाता है, जिसमें बढ़े हुए तेल के दाम और कमजोर होता ग्लोबल ट्रेड माहौल शामिल है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और घरेलू वित्तीय चिंताओं की वजह से रुपये में हालिया कमजोरी और बढ़ गई है, जिससे सेंट्रल बैंक को कदम उठाना पड़ा है। हालांकि, ट्रेडर्स इस बात पर बंटे हुए हैं कि मौजूदा रणनीति पर्याप्त होगी या नहीं। कुछ लोगों का तर्क है कि ट्रेड डेफिसिट और महंगाई जैसे बुनियादी आर्थिक मुद्दों को हल किए बिना, रुपया मार्केट सेंटिमेंट के प्रति संवेदनशील बना रहेगा (Google News India)।

जैसे-जैसे हफ्ता आगे बढ़ेगा, बाजार के लोग भविष्य के दखल और मॉनेटरी टाइटनिंग के संकेतों के लिए RBI की पॉलिसी मिनट्स पर करीबी नजर रखेंगे। सेंट्रल बैंक ने अपने हालिया फॉरेक्स ऑपरेशनों पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, जिससे ट्रेडर्स को इसके कदमों के पैमाने और इरादे का खुद अंदाजा लगाना पड़ रहा है। जो बात साफ है, वह यह है कि रुपये की चाल घरेलू नीतिगत फैसलों और ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स दोनों पर निर्भर करेगी, जिसमें RBI स्थिरता और बाजार की आजादी के बीच एक बहुत ही नाजुक संतुलन बनाकर चल रहा है (Reuters)।

सोर्सेज: Google News India, Reuters India

उल्लिखित स्रोत

Google News India·Reuters India