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बाबुल मंदेब जलडममध्यम में जहाज पर हूथी हमला, छह लोगों की मौत

President Donald Trump likes to say he started his war with Iran after 50 years of economic pressure failed to stop its nuclear weapons ambitions.
President Donald Trump likes to say he started his war with Iran after 50 years of economic pressure failed to stop its nuclear weapons ambitions. Photo via AP India

यमन के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने बाबुल मंदेब जलडममध्यम में यमन के एक कमर्शियल जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसमें चार क्रू मेंबर और दो सरकारी-समर्थित लड़ाकों सहित छह लोगों की मौत हो गई (AP India)। इस क्षेत्र में हालिया तनाव के बीच शिपिंग पर हूथी हमलों में मौत का यह पहला मामला सामने आया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब दूसरी ओर अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे पनामा के झंडे वाले एक जहाज पर गोलीबारी की। इन घटनाओं ने लाल सागर और ओमान की खाड़ी में बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है, जहां ईरान, उसके सहयोगियों और पश्चिमी ताकतों के बीच चल रहे संघर्ष के चलते शिपिंग रूट एक संवेदनशील और विवादित मुद्दा बन गए हैं।

यमन के जहाज पर हूथी हमला ऐसे समय में हुआ है जब मोखा पोर्ट सिटी सहित सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों पर हमले तेज हो गए हैं। यह हमला सऊदी अरब के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों के पैटर्न का हिस्सा है, जो यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। विद्रोहियों के मुख्य negotiator, Mohammed Abdul-Salam ने सऊदी अरब पर 2022 के युद्धविराम का फायदा उठाकर नौसैनिक नाकेबंदी को और सख्त करने का आरोप लगाया, जबकि तेहरान ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयासों को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वित्तीय दबाव के नए प्रयासों का जवाब देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जब भी वॉशिंगटन कूटनीति अपनाने में खुद को असमर्थ पाता है, वह प्रतिबंधों के पीछे छिप जाता है” (AP India)।

ट्रम्प, जिन्होंने इस संघर्ष को आर्थिक दृढ़ संकल्प की परीक्षा के रूप में पेश किया है, ने सोमवार को दावा किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था “पूरी तरह से दिवालिया” हो चुकी है और वह अपनी सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखने में असमर्थ है। उन्होंने इसके पीछे हाइपरइ inflación और सैनिकों को वेतन न मिलने का हवाला दिया (AP India)। उनके प्रशासन ने, जिसने इस प्रतिबंध रणनीति को “ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी” नाम दिया है, का तर्क है कि महीनों की बमबारी ने ईरान को वित्तीय पतन के कगार पर ला दिया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस खतरे को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है, और दुनिया की 20% ऑयल सप्लाई के रास्ते यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के अमेरिकी प्रयासों में लगातार रुकावटें आई हैं। इस क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता की आशंकाओं का आकलन करते हुए ट्रेडर्स ने सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की।

पिछले महीने तुर्की में नाटो समिट से उनके गुप्त रूप से लौटने के खुलासे के बाद राष्ट्रपति की पर्सनल सिक्योरिटी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि एक संभावित खतरे के कारण उन्होंने यात्रा के बीच में ही एयर फोर्स वन को छोड़ दिया था और इसके बजाय एक छोटे सैन्य विमान से यात्रा की (AP India)। इस ऑपरेशन में व्हाइट हाउस के स्टाफ और पत्रकारों को ले जा रहा एक डिकॉय प्लेन शामिल था, जबकि ट्रम्प को एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान में स्थानांतरित किया गया था। खतरों को कम करके आंकते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था।” एक्सपर्ट्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के लिए इस स्तर की गोपनीयता को अभूतपूर्व बताया है।

इस बीच, नेशनल ऑयल Corporation के अनुसार, लीबिया में त्रिपोली के पश्चिम में एक प्रमुख ऑयल टाउन पर ड्रोन हमलों में रिफाइनरी और फ्यूल स्टोरेज फैसिलिटी में भीषण आग लग गई (AP India)। दो दिनों के दौरान हुए इन हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन देश के सबसे बड़े एनर्जी हब में से एक में कामकाज बाधित हो गया है। पूर्वी लीबिया में, बेनगाजी में एक कार बम विस्फोट में एक सीनियर मिलिट्री ऑफिसर की मौत हो गई, जो देश की लगातार बनी हुई अस्थिरता को उजागर करता है।

भारत में, पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज मंत्रालय ने कार्गो मूवमेंट को बेहतर बनाने के लिए विशाखापत्तनम पोर्ट पर ₹334.89 करोड़ की एक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह पूर्वी तट पर बुनियादी ढांचे के बड़े उन्नयन (अपग्रेड) का हिस्सा है (PIB)। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को बढ़ावा देने वाले 'हर घर तिरंगा' अभियान में भाग लेने की अपील की है (PIB)। उन्होंने निःस्वार्थ सेवा पर जोर देने वाला एक संस्कृत सुभाषित भी शेयर किया, हालांकि इन संदेशों में वैश्विक बाजारों और शिपिंग रूटों में हलचल पैदा करने वाले अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया।

नई दिल्ली ने अलग से चीन के साथ हालिया सीमा तनाव पर बात करते हुए दोहराया कि विवादित क्षेत्रों में शांति द्विपक्षीय संबंधों के लिए "बेहद जरूरी" है (Google News India)। विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश सीमा पर हुई "सबसे गंभीर" घटनाओं को स्वीकार किया, लेकिन कोई ब्योरा नहीं दिया और कहा कि दोनों पक्ष गलतफहमियों से बचने के लिए मौजूदा चैनलों का इस्तेमाल करने पर सहमत हो गए हैं। ये टिप्पणियां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से ठीक पहले आई हैं।

चूंकि क्षेत्रीय संघर्षों के थमने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, इसलिए सैन्य कार्रवाइयों, आर्थिक दबाव और कूटनीतिक पैंतरों के बीच तालमेल लगातार बदल रहा है। जो बात अभी भी साफ नहीं है, वह यह है कि क्या ईरान पर वित्तीय दबाव से कोई समझौता हो पाएगा या दुश्मनी और बढ़ेगी, और कैसे वैश्विक ताकतें प्रमुख जलमार्गों पर बढ़ते जोखिमों के साथ एनर्जी सिक्योरिटी में संतुलन बनाए रखेंगी।

उल्लिखित स्रोत

AP India·PIB