केरल में भारी बारिश और भूस्खलन से 6 लोगों की मौत

केरल में भारी बारिश के कारण बार-बार भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं, जो राज्य की भौगोलिक स्थिति और मानसून के तीव्र पैटर्न से जुड़ा एक निरंतर खतरा है। द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बात की पड़ताल की है कि ऐसी घटनाएं क्यों होती रहती हैं। इसमें अत्यधिक वर्षा, कमजोर इलाके और भूमि उपयोग में बदलाव के बीच आपसी तालमेल पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। यह विश्लेषण ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र को एक बार फिर गंभीर मौसम का सामना करना पड़ रहा है, जो भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए लगातार बने जोखिम को रेखांकित करता है।
विनाशकारी वायनाड भूस्खलन के दो साल बाद, शनिवार को अत्यधिक भारी बारिश के कारण केरल के कई हिस्सों में फिर से भूस्खलन, कीचड़ धंसने (मडस्लाइड) और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और कई अन्य के लापता होने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने नौ जिलों — इडुकी, कोट्टायम, पथानामथिट्टा, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड — के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। साथ ही, भारी से अत्यधिक भारी बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है (Indian Express)।
केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने इडुकी, कोट्टायम और पथानामथिट्टा के जिलाधिकारियों को आपातकालीन तैयारियां करने और जिला स्तर पर बचाव कार्यों का समन्वय करने के निर्देश दिए हैं (Indian Express)। IMD ने यह भी चेतावनी दी है कि रविवार को अलग-अलग स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
तिरुवनंतपुरम में IMD के मौसम विज्ञान केंद्र की प्रमुख नीथा के गोपाल ने बताया कि इस तीव्र बारिश की वजह दक्षिण गुजरात तट से लेकर केरल तक फैला एक अपतटीय ट्रफ, अरब सागर से चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं और पश्चिमी तट के साथ एक मजबूत उत्तर-दक्षिण दबाव प्रवणता (प्रेशर ग्रेडिएंट) थी। इन सभी स्थितियों ने मिलकर मानसून के प्रवाह को और मजबूत किया और पूरे राज्य में व्यापक बारिश दर्ज की गई (Indian Express)।
नीथा गोपाल ने कहा, "यह बारिश एक या दो जगहों तक सीमित नहीं थी। यह एक व्यापक और भारी बारिश की घटना थी।" शनिवार को केरल के जिन 109 IMD स्टेशनों पर बारिश दर्ज की गई, उनमें से 53 में 7 सेमी से अधिक बारिश हुई। कुछ स्टेशनों पर तो बारिश “अत्यधिक भारी” श्रेणी में दर्ज की गई, जिसे IMD 24 घंटे में 20.4 सेमी से अधिक बारिश के रूप में परिभाषित करता है। उन्होंने आगे कहा कि कम समय में बहुत अधिक मात्रा में बारिश हुई, जिससे पानी के निकलने का समय ही नहीं मिल पाया (Indian Express)।
नीथा गोपाल ने कहा, "यह पिछली बारिश का मिला-जुला असर था, जो आज की तेज और व्यापक बारिश की गतिविधि के साथ जुड़ गया," और इस बात पर जोर दिया कि भूस्खलन केवल एक बार में हुई भारी बारिश के कारण नहीं हुआ (Indian Express)।
भूस्खलन ऐसी प्राकृतिक आपदाएं हैं जो मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में अनुकूल मिट्टी, चट्टान, भूविज्ञान और ढलान की स्थिति के कारण होती हैं। ढलान से चट्टानों, बड़े पत्थरों, मिट्टी या मलबे के अचानक नीचे खिसकने को भूस्खलन कहा जाता है। हालांकि ये काफी आम हैं, लेकिन भूस्खलन बेहद खतरनाक होते हैं और इससे इंसानों व जानवरों की जान को खतरा पैदा होता है। इसके अलावा, संपत्ति, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचता है, संचार लाइनें बाधित होती हैं और बिजली के तार टूट जाते हैं (Indian Express)।
भूस्खलन आम तौर पर कारकों के दो अलग-अलग समूहों के संयोजन से होता है। कंडीशनिंग कारक, जैसे कि मिट्टी की स्थलाकृति, चट्टानें, भूआकृति विज्ञान (जियोमॉर्फोलॉजी) और ढलान के कोण, देश के कुछ हिस्सों को दूसरों की तुलना में अधिक संवेदनशील बनाते हैं। ट्रिगरिंग (बढ़ावा देने वाले) कारकों में भारी बारिश और मानवीय गतिविधियां शामिल हैं, जैसे कि अनियोजित भूमि उपयोग, अवैज्ञानिक निर्माण और जंगलों की बड़े पैमाने पर कटाई। भारत में अधिकांश भूस्खलन बारिश के कारण होने वाली घटनाएं हैं। अन्य प्राकृतिक कारणों में भूकंप, बर्फ पिघलना और बाढ़ के कारण ढलानों का नीचे से कटाव शामिल है (Indian Express)।

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