गोवा के वोटर ने इलेक्शन कमीशन की मांग को कोर्ट में दी चुनौती

इलेक्शन कमीशन ने गोवा में एक व्यक्ति से ऐसा डिक्लेरेशन जमा करने को कहा है, जिसके बारे में उस व्यक्ति का कहना है कि वह झूठा है। इसी बात को लेकर मामला कोर्ट में पहुंच गया है। इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या जरूरी बयान तथ्यों को सही ढंग से पेश करता है या नहीं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इसका पालन करने का मतलब झूठा डिक्लेरेशन देना होगा। अब यह मामला कोर्ट के विचाराधीन है, जो कमीशन की मांग की वैधता पर फैसला करेगा।
गोवा के एक निवासी ने इलेक्शन कमीशन की उस मांग को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया है, जिसमें ऐसे डिक्लेरेशन की मांग की गई है जिसे याचिकाकर्ता ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' द्वारा शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्यवाही में एक वोटर के रूप में पहचाने गए याचिकाकर्ता का तर्क है कि कमीशन की इस शर्त को पूरा करने का मतलब गलत बयान देना होगा।
यह कानूनी चुनौती चुनाव निकाय द्वारा मांगे गए विशिष्ट डिक्लेरेशन को लेकर है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अनिवार्य किए गए डिक्लेरेशन की सामग्री उनके मामले के तथ्यों से मेल नहीं खाती है, जिससे यह मांग कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं रह जाती है। न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाकर, वह वोटर एक ऐसा डिक्लेरेशन सौंपने की मजबूरी से राहत मांग रहा है जिसे गलत बताया गया है, और उसका जोर है कि ऐसा करना गलत होगा।
यह मामला फिलहाल एक कोर्ट में लंबित है, जो अब इलेक्शन कमीशन के निर्देश की वैधता और इस बात की जांच करेगा कि क्या याचिकाकर्ता को उसके मौजूदा स्वरूप में डिक्लेरेशन जमा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। यह कानूनी कार्यवाही संभावित रूप से झूठे हलफनामे के जरिए खुद को फंसाने के खिलाफ किसी व्यक्ति के अधिकार के मुकाबले कमीशन की प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं की परीक्षा लेगी।

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