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यूएन की बैठक में भारत ने वैश्विक महामारी से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

Union Health Secretary Punya Salila Srivastava addresses the United Nations High-Level Meeting on Pandemic Prevention, Preparedness and Response in New York.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव न्यूयॉर्क में महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करती हुईं। Photo via Newindianexpress

भारत ने महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया, जहां केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने देश का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में भारत ने वैश्विक महामारी की तैयारियों और उससे निपटने के प्रयासों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की देश की प्रतिबद्धता को दोहराया (Google News India)। सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कोविड-19 महामारी से मिले सबक को निरंतर निवेश, संस्थागत क्षमता और मजबूत हेल्थ सिस्टम में बदलने की जरूरत पर जोर दिया (Google News India)।

श्रीवास्तव ने महामारी की रोकथाम और उससे निपटने के लिए भारत के समन्वित, संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-समाज वाले दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जिसके दायरे में विभिन्न प्रकार की संभावित स्वास्थ्य आपातस्थितियां आती हैं (Google News India)। उन्होंने लैब नेटवर्क, आपातकालीन समन्वय तंत्र, स्वास्थ्य कार्यबल, स्टॉकपाइल और क्लिनिकल केयर क्षमता को बढ़ाने के प्रयासों का ब्योरा दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिस्टम स्वास्थ्य आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें (Google News India)। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की जड़ें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों, विकास योजनाओं और घरेलू वित्त पोषण में होनी चाहिए, जबकि अंतरराष्ट्रीय सहायता को राष्ट्रीय जिम्मेदारी का पूरक होना चाहिए (Google News India)।

कोविड-19 के दौरान भारत के अनुभव का हवाला देते हुए, श्रीवास्तव ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल पब्लिक गुड के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग की (Google News India)। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान सर्विलांस, वैक्सीनेशन, जोखिम संचार, सप्लाई चेन और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता में डिजिटल समाधानों ने अहम भूमिका निभाई थी (Google News India)। उन्होंने आवश्यक स्वास्थ्य उत्पादों तक एकजुटता और निष्पक्ष पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया। इस दौरान उन्होंने लगभग 100 देशों और दो संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं को भारत द्वारा 300 मिलियन वैक्सीन खुराक की आपूर्ति के साथ-साथ 150 से अधिक देशों को दी गई मेडिकल सहायता का जिक्र किया (Google News India)। उन्होंने इन कदमों को "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" (One Earth, One Health) के सिद्धांत और ग्लोबल साउथ के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया (Google News India).

मई 2025 में अपनाए गए WHO पैथोजन एग्रीमेंट का जिक्र करते हुए, श्रीवास्तव ने इसे एक अहम मील का पत्थर बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इसकी विश्वसनीयता एक निष्पक्ष पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (PABS) सिस्टम पर निर्भर करेगी (Google News India)। उन्होंने तर्क दिया कि पैथोजन और जैविक संसाधन मुहैया कराने वाले देशों को राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स, थेरेप्यूटिक्स, तकनीकों और अन्य लाभों तक समय पर पहुंच मिलनी चाहिए (Google News India)। उन्होंने कहा कि इस राजनीतिक घोषणा से PABS एनेक्सी पर चल रही बातचीत प्रभावित नहीं होनी चाहिए और इसे राष्ट्रीय परिस्थितियों तथा क्षमताओं के अनुसार लागू किया जाना चाहिए (Google News India)। "वन हेल्थ" दृष्टिकोण के संबंध में, उन्होंने इसे घरेलू कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार उचित रूप से लागू करने का आह्वान किया (Google News India)।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब यूएन महामारी की तैयारियों को लेकर गति पैदा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे बाध्यकारी ढांचे को अंतिम रूप देने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है (AP India)। श्रीवास्तव ने इस एजेंडे को आगे बढ़ाने में मेंबर स्टेट्स की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया, हालांकि PABS एनेक्सी पर आम सहमति की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

उल्लिखित स्रोत

AP India·Google News India·PIB