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कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा

ट्रंप प्रशासन द्वारा दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों पर शुरू किए गए नए "आर्थिक हमले" को चीन के मामले में एक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों पर शुरू किए गए नए "आर्थिक हमले" को चीन के मामले में एक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। Photo via AP India

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मंगलवार को अपने इस रुख पर अडिग रहे कि उनकी सरकार ने अमेरिकी सामानों पर लगभग 20 अरब डॉलर का जवाबी टैरिफ लगा दिया है। उन्होंने कहा, "जब आप पर हमला होता है, तो आप युद्ध की स्थिति में होते हैं। हम पर हमला हुआ है।" अमेरिकी स्टील, डेयरी उत्पादों, घरेलू उपकरणों और कृषि उपकरणों को निशाना बनाने वाले इन कदमों से दोनों पुराने सहयोगियों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, हालांकि विश्लेषकों का सुझाव है कि एक पूर्ण ट्रेड वॉर को अभी भी टाला जा सकता है (AP India)।

ये टैरिफ पिछले हफ्ते बातचीत टूटने और सप्ताहांत में अमेरिका द्वारा चुनिंदा कनाडाई आयात पर 50% ड्यूटी लगाने के कदम के बाद आए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ओटावा की इस जवाबी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कनाडाई नेताओं को चेतावनी दी कि वे "बात मान लें" या वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर संभावित नए टैक्स सहित "इससे भी बदतर" नतीजों का सामना करें। ओंटारियो के प्रीमियर डौग फोर्ड ने बयानबाजी को और तेज करते हुए अमेरिका को बिजली और क्रिटिकल मिनरल का निर्यात बंद करने की धमकी दी, जबकि ट्रम्प ने अपने समकक्ष पर कटाक्ष करते हुए मजाक में लेक ओंटारियो का नाम बदलकर "लेक अमेरिका" रखने का प्रस्ताव रखा (AP India)।

गर्मी पैदा करने वाली इस बयानबाजी के बावजूद, जानकारों का कहना है कि स्थिति को सामान्य करने की गुंजाइश अभी बाकी है। अमेरिकी टैरिफ फिलहाल अमेरिका को होने वाले कनाडाई निर्यात के केवल 5% हिस्से को प्रभावित करते हैं, और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि अगले साल कनाडाई ग्रोथ पर इसका असर बहुत कम यानी 1.6% से घटकर 1.4% रहने का अनुमान है। कनाडाई जवाबी कार्रवाई 8 सितंबर से लागू होने वाली है, जिससे कूटनीति के लिए एक तात्कालिक मौका मिल रहा है। अमेरिका की पूर्व ट्रेड नेगोशिएटर वेंडी कटलर ने कहा, "अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो इससे निकलने का रास्ता भी है" (AP India)।

ऐतिहासिक मिसालें इस बात का समर्थन करती हैं कि सतर्क रहते हुए उम्मीद रखी जा सकती है। दोनों देश पहले भी कनाडा के डेयरी संरक्षण और सॉफ्टवुड लंबर सब्सिडी जैसे मुद्दों पर आपस में टकरा चुके हैं, लेकिन अंत में समझौते पर पहुंच ही गए। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर यूएस-कनाडा के क्रिस्टोफर सैंड्स ने कहा, "यह तब तक वास्तविक नहीं लगता जब तक कि कोई टेबल से उठकर न चला जाए"

उल्लिखित स्रोत

AP India·PIB