योगेंद्र यादव ने '' में देशभक्ति पर लिखा लेख
'' में आज प्रकाशित योगेंद्र यादव का यह नया लेख एक तीखे सवाल के साथ शुरू होता है: “अब हम किस बारे में गाएंगे, जब हम देशभक्ति का गीत गाएंगे?” What will we sing of now, when we sing of patriotism शीर्षक वाला यह लेख समकालीन भारत में राष्ट्रीय गर्व के बदलते नजरिए पर गहराई से विचार करता है, और यह सोचने पर मजबूर करता है कि मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक माहौल में इस अवधारणा को कैसे देखा और बयां किया जाता है।
राजनीतिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी के सह-संस्थापक योगेंद्र यादव द्वारा लिखा गया यह लेख इस अखबार के 18 अगस्त 2026 के अंक में छपा है। हालांकि उपलब्ध स्रोतों में इस लेख का पूरा पाठ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसका शीर्षक ही देशभक्ति से जुड़े बदलते प्रतीकों, मूल्यों और भावनाओं की टटोल का संकेत देता है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक '' में शासन, समाज और विचारधारा पर अक्सर विश्लेषण छपते रहते हैं, और यादव का यह लेख भारतीय पहचान पर चल रही एक बड़ी बहस का हिस्सा है।
यादव के काम का अक्सर समकालीन राजनीति की आलोचना और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक जुड़ाव की वकालत से नाता रहा है। देशभक्ति को "गाने" के इर्द-गिर्द चर्चा को गढ़ने की उनकी पसंद इस बात की ओर इशारा करती है कि उनका जोर राष्ट्रवाद की सांस्कृतिक और भावनात्मक अभिव्यक्तियों पर है, जैसे कि वे गीत, गान या लोककथाएं जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से सामूहिक पहचान को तय किया है। यह सवाल देशभक्ति के पारंपरिक पैमानों और तेजी से बदलते समाज में उभर रही नई, और शायद विवादित, व्याख्याओं के बीच तनाव को दर्शाता है।
इस लेख का प्रकाशन भारत में राष्ट्रवाद को लेकर चल रही बहसों के बीच हुआ है, जहां हाल के वर्षों में नागरिकता, ऐतिहासिक कथाओं और असहमति की भूमिका पर चर्चाएं तेज हुई हैं। हालांकि उपलब्ध स्रोतों में यादव के लेख की खास दलीलों का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अकेला शीर्षक ही पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि आज के दौर में राष्ट्रीय गर्व के किन पहलुओं का जश्न मनाया जा रहा है, किसे छोड़ा जा रहा है या किस तरह नए सिरे से कल्पना की जा रही है।
फिलहाल, यादव के इस लेख पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या व्यापक जन-प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह लेख अपने आप में एक स्वतंत्र टिप्पणी बना हुआ है, जो इसके द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल को खुला छोड़ देता है: ऐसे दौर में, जो एकजुटता और विभाजन दोनों से घिरा है, भारतीय देशभक्ति को कैसे परिभाषित और व्यक्त करते हैं?