अमित शाह ने संसद के सवालों के जवाब देने की इच्छा जताई

बुधवार (12 अगस्त, 2026) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुडुचेरी पुलिस को 'प्रेसीडेंट्स कलर्स' प्रदान किए, जो राष्ट्रीय पुलिसिंग ढांचे में केंद्र शासित प्रदेश के एकीकरण की औपचारिक पुष्टि का प्रतीक है। पुडुचेरी के तटीय शहर में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान शाह ने कानून व्यवस्था में “आधुनिकता और अनुशासन” की आवश्यकता पर जोर दिया (PIB)। दिन में बाद में, शाह ने अपना ध्यान संसदीय मामलों की ओर केंद्रित किया और मानसून सत्र में चल रहे हंगामे पर बोलते हुए कहा, “मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने और NEET के मुद्दे से जुड़े छात्रों के विरोध प्रदर्शन के सभी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए तैयार हूँ” (The Hindu)।
गृह मंत्री की यह टिप्पणी संसद के दोनों सदनों में बार-बार होने वाले स्थगन के बीच आई है, जहाँ विपक्षी दल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर बहस की मांग कर रहे हैं, जो अब देश भर में छात्रों के बड़े आंदोलनों का रूप ले चुके हैं। लोकसभा में कार्यवाही के एक संक्षिप्त दौर के दौरान बोलते हुए शाह ने सत्र की अवधि बढ़ाने की सरकार की इच्छा को दोहराया और कहा, “हम आज देर रात तक सत्र जारी रखने के लिए तैयार हैं” (Indian Express)। पिछले एक हफ्ते से नारेबाजी कर रहे सांसदों और प्रक्रियात्मक गतिरोधों के चलते कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी, जिसके बाद यह प्रस्ताव आया (The Hindu)।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिन में अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं की मेजबानी की। उन्होंने उनके “प्रेरणादायक प्रदर्शन” की सराहना की और उनकी उपलब्धियों को व्यापक राष्ट्रीय प्रगति से जोड़ा (PIB)। इस मुलाकात में तस्वीरें और अनौपचारिक बातचीत भी शामिल थीं, जो संसद के तनावपूर्ण माहौल के उलट थी, जहाँ शाह के खुलेपन के आश्वासन का असर अभी तक ठोस बहस के रूप में नहीं दिखा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में क्षेत्रीय पक्षपात के आरोपों पर केंद्रित NEET का यह विवाद विपक्षी एकता का एक बड़ा मुद्दा बन गया है, और पार्टियां इस परीक्षा को स्थगित करने या इसमें सुधार की मांग कर रही हैं।
विधायिका के कामकाज के लिए आम तौर पर एक महत्वपूर्ण समय माने जाने वाले मानसून सत्र की शुरुआत से ही इसकी उत्पादकता सीमित रही है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही प्रक्रियात्मक गतिरोध में फंसे हुए हैं। हालांकि शाह का बयान चर्चा में शामिल होने की शुरुआती इच्छा को दर्शाता है, लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार चर्चा के लिए औपचारिक प्रस्ताव लाएगी या नहीं, या फिर विपक्षी दल बिना किसी अतिरिक्त रियायत के इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे या नहीं। सत्र का भविष्य और NEET विवाद का समाधान आने वाले दिनों में पर्दे के पीछे होने वाली बैठकों और वार्ताओं पर निर्भर करेगा।


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